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ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मुकदमा चलेगा, संत हुए आनंदित …

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मुकदमे में वाराणसी जिला अदालत के आदेश के बाद अयोध्या के साधु संतों में हर्ष की लहर दौड़ गई। वाराणसी जिला अदालत ने इस मुकदमे को सुनवाई योग्य माना है बस इसी एक लाइन से अयोध्या के संतों का उत्साह बढ़ गया साथ ही एक उम्मीद भी जगी है की एक दिन अयोध्या की तरह ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मुकदमे में भी हिंदू पक्ष को सफलता मिलेगी ।

राजू दास (महंत हनुमानगढ़ी )… शांति की नहीं क्रांति की जरूरत हैं । वह क्रांति कैसी संवैधानिक क्रांति । जिस प्रकार से मोदी जी ने इंडिया गेट से शुरुआत किया मोदी जी ने कहा की जो विदेशी आक्रांताओ की जो निशानी हैं उसको हटाना चाहिए । आप देखिए की आज सोमवार हैं भगवान भोले का दिन हैं आज की शुरुआत देखिये की जो वरशिप एक्ट का मामला लेकर और मुस्लिम पक्ष के कहता था की नहीं ये अधिकार हिन्दुओ को नहीं हैं । इस कोर्ट जाने का इस पक्ष को हटाने का लेकिन मैं कोर्ट को साधुवाद दूंगा श्री राम में मुझे आस्था हैं आज विजय मिला हैं और आज ख़ुशी का दिन हैं और यही नहीं मथुरा को काशी के साथ साथ 20 हज़ार मंदिर ऐसे हैं जहाँ पर हम विजय हासिल करेंगे।
जगतगुरु रामदिनेशाचार्य ( संत अयोध्या )… ज्ञानव्यापी मामले पर आज कोर्ट द्वारा ऐतिहासिक फैसला लिया गया पूरा देश पूरा समाज आज इस बात के लिए प्रसन्नता व्यक्त करता हैं । जिस प्रकार से मुगलो के द्वारा इस देश में षड्यंत्र करके हमारी जन आस्था और हिन्दू के केन्द्रो को खंडित विखंडित किया गया था लगता हैं उसके पुनः उत्थान का समय आ गया हैं और इसी पक्ष में आज कोर्ट ने जिस प्रकार से इस मामले को सुनवाई के लिए जायज़ माना हैं और मुस्लिम पक्ष के मामले को निरस्त किया हैं ये स्वागत योग्य हैं । लगता हैं की मुगलो के द्वारा स्थापित की गयी परम्पराओ का समापन होना चाहिए और राष्ट्रीय परम्परा स्थापना होनी चाहिए और भगवान भोलेनाथ गौरी के साथ वहा विराजमान होंगे ये सन्देश पूरे देश में जाना चाहिए।
Byte .. आचार्य सत्येंद्र दास मुख्य पुजारी राम जन्मभूमि …. बहुत अच्छी बात है बहुत सूझ बुझ करके कोर्ट ने यह निर्णय लिया है कि कोर्ट में यह सुनवाई योग्य है । इसलिए श्रृंगार गौरी की जो पूजा होती थी उसी पूजा की मांग किया गया था कि श्रृंगार गौरी की पूजा हो और इस बात को हिंदू पक्ष ने प्रार्थनापत्र दिया था मांग किया था कोर्ट से और उसका विरोध करने के लिए मुसलमानों ने उसका कहा की सुनवाई योग्य नहीं हैं। इसको नहीं सुनना चाहिए लेकिन सब कुछ देखते हुए क्योंकि बहुत कुछ वहा सर्वे हुआ हैं प्रमाण वहा उपस्थित किये गए हैं सारे सबूतों को देखते हुए कोर्ट ने कहा की नहीं ये जो केस हैं ओ सुनवाई योग्य हैं इसलिए अभी तक तो उनके खारिज किया हैं प्रार्थनापत्र स्वीकार किया हैं । हिन्दू के पक्ष में जो पड़ा हुआ प्राथना पत्र हैं उसे स्वीकार कर लिया हैं आगे तारीख भी दे दिया हैं । इसलिए वह आगे तारीख तक सब सबूतों के साथ हिन्दू पक्ष अपना पेश करेगा । जिसके फलस्वरूप वह जैसे और मंदिरो में होता हैं जैसे रामजन्म भूमि में आदेश हुआ हैं वैसे ही सबूतों के आधार पर ज्ञानव्यापी का भी एक गौरी शृंगार का आदेश हो जएगा उसके बाद में वही आगे चलता रहेगा और फिर वही ज्ञानव्यापी के पक्ष में आदेश होगा । ऐसा विश्वास हो गया हैं क्योंकि जितने भी सबूत हैं जो सर्वे हुआ हैं ओ सब हिन्दू पक्ष में हैं हिन्दू पक्ष को देखते हुए ही कोर्ट ने निर्णय लिया हैं आगे इसका केस चलता रहेगा दोनों पक्ष के सबूत देखे जयेंगे जिनका सबूत सही होगा यथार्थ होगा उसके पक्ष में आदेश हो जाएगा।

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