हाल ही में बांग्लादेश के संसदीय चुनावों में गयेश्वर चंद्र रॉय की जीत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। रॉय बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता हैं और वे ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, जो कि अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से आने वाले नेताओं में एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरते हैं। बांग्लादेश के राजनीति के वर्तमान परिदृश्य के बीच रॉय ने एक विशेष साक्षात्कार में भारत-बांग्लादेश रिश्तों, अल्पसंख्यक सुरक्षा, और BNP के एजेंडे पर विस्तृत विचार साझा किए हैं, जो दोनों देशों के बीच सहमति, चिंताओं और आशाओं को उजागर करता है।
रॉय ने इस साक्षात्कार में कहा कि BNP “कम्युनिटी-विशेष अधिकारों पर आधारित पार्टी नहीं है” और किसी भी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह नहीं रखता, बल्कि वे खुद को बांग्लादेश के सभी नागरिकों का प्रतिनिधि मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि BNP का दृष्टिकोण धर्म या समुदाय से ऊपर उठकर ‘राष्ट्रीयता’ और सबको समान अधिकार देने पर केंद्रित है। उनके अनुसार, पार्टी राज्य के सभी नागरिकों, चाहे वे मुस्लिम, हिंदू या किसी अन्य समुदाय के हों, समान सुरक्षा, शिक्षा और अवसर पाने की इच्छा रखती है।
भारत-बांग्लादेश के बीच संबंधों पर पूछे जाने पर रॉय ने कहा कि “भारत हमारे सबसे करीबी पड़ोसी देश है और दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर, सम्मानजनक और साझा हितों पर आधारित होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को किसी एक नेता, पार्टी या घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि समग्र रूप से दोनों देशों के लोगों और संस्थानों के बीच ऐतिहासिक सम्मान और सहयोग पर आधारित होना चाहिए। रॉय ने दोनों देशों के आपसी हितों जैसे व्यापार, सुरक्षा, सीमा तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
साक्षात्कार में रॉय ने अल्पसंख्यक समुदायों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर व्यापक विचार भी रखे। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय के अनुभव और चिंताओं की चर्चा रही है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अब BNP के नेतृत्व में सबको न्याय और सुरक्षा मिलेगी जिससे साम्प्रदायिक तनाव को कम करने का प्रयास होगा। रॉय का कहना था कि जब BNP सत्ता में आयेगी तो संविधान के तहत सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और समानता तथा कानून की शासन प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी।
बांग्लादेश के नए राजनीतिक माहौल में रॉय जैसे नेताओं का उदय एक महत्वपूर्ण संकेत है। यह न केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लिए प्रतिनिधित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी इंगित करता है कि BNP नए स्वरूप में “बहु-आयामी और समावेशी” राजनैतिक एजेंडा के साथ आगे बढ़ रही है। रॉय के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि BNP न केवल घरेलू राजनीति पर ध्यान दे रही है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति, अंतर-सरकारी सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी विस्तार से समझने और विकसित करने पर जोर दे रही है।
इस साक्षात्कार को बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल, नई सरकार के गठन और दोनों देशों के बीच राजनीतिक-आर्थिक सम्बन्धों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रॉय जैसे नेताओं की आवाजें इस क्षेत्र की राजनीति में पारदर्शिता, लोकतंत्र और समानता पर आधारित शासन की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देती हैं, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास, सुरक्षा और सहयोग को एक नया आयाम मिल सकता है।
इस प्रकार, गयेश्वर चंद्र रॉय का यह साक्षात्कार न केवल BNP के दृष्टिकोण और राजनीतिक प्राथमिकताओं को उजागर करता है, बल्कि बांग्लादेश-भारत संबंधों, अल्पसंख्यक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की व्यापक चर्चा को भी मजबूत बनाता है, जो आगामी समय में इस क्षेत्र की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
