1 फरवरी 2026 को भारत का आम बजट पेश होते ही शेयर बाजार में तेज़ और अचानक गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को अरबों-खरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। बजट पेश होने के दौरान शुरू हुई गिरावट ने BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में भारी दबाव डाला और बाजार का माहौल पूरी तरह Bearish (निराशावादी) हो गया।
बजट घोषणा के बाद सेंसेक्स में 2,300 अंकों तक की गिरावट देखी गई और निफ्टी भी लगभग 750 अंकों तक लुढ़क गया, जिससे बाजार में अस्थिरता और चिंता का माहौल कायम हो गया। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़, बीईएल (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड), अडानी पोर्ट्स और टाटा जैसे बड़े निगमों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि इस गिरावट में एक प्रमुख भूमिका डेरिवेटिव्स (futures & options) पर सिक्योरिटीज़ ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की बजट में घोषणा ने निभाई, जिससे ट्रेडिंग लागत बढ़ी और कई ट्रेडर्स व निवेशक Positions बंद करने को मजबूर हुए। इस निर्णय से विशेष रूप से Derivatives (विकल्प और फ्यूचर्स) से जुड़े Exchange और Brokerage Stocks में भारी बिकवाली देखी गई।
इस गिरावट का असर बाजार की कुल पूंजीकरण (Market Capitalization) पर भी पड़ा है। नामांकित डेटा के मुताबिक बाजार में एक झटके में करीब ₹8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिससे बड़ी संख्या में छोटे और बड़े निवेशक प्रभावित हुए।
कुछ रिपोर्टों ने इस घटनाक्रम को ‘ब्लैक संडे’ (Black Sunday) के रूप में वर्णित किया है, क्योंकि बजट के तुरंत बाद निवेशकों के भरोसे में भारी गिरावट आई और व्यापक रूप से बाजार कमजोर पड़ा दिखा। इसमें अनुमान लगाया गया है कि निराशाजनक आर्थिक संकेतों, टैक्स तथा नीति प्रस्तावों के कारण निवेशकों ने बड़े स्तर पर बिकवाली की।
वैश्विक आर्थिक माहौल और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के रुख पर भी नजर बनी हुई है। बजट से पहले से ही एक तरह की अनिश्चितता थी कि क्या नया बजट FII (Foreign Institutional Investors) को भारत के बाजार में निवेश के लिए आकर्षित कर पाएगा या नहीं, और बाजार में स्थिरता ला पाएगा — इसका भरोसा अभी भी संशय के तहत है।
इस प्रकार, बजट 2026 की घोषणाओं के ठीक बाद शेयर बाजार में आई अचानक पतन ने निवेशकों को भारी आर्थिक झटका दिया, जिससे निवेशकों के लंबे-अवधि और छोटे-अवधि के पोर्टफोलियोज़ को गंभीर प्रभाव का सामना करना पड़ा। आगे आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार किस दिशा में रुख बदलता है और क्या सरकार के फैसलों से निवेशकों का भरोसा वापस लौटता है।
