एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। मस्क ने अंबानी पर निशाना साधने के बाद रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) को दिए गए राजनीतिक चंदे से संबंधि खबरों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए हैं। यह कदम उन्होंने अंबानी को तंज भरे अंदाज में ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहने और भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर सवाल उठाने के कुछ घंटों बाद उठाया।
मस्क की ओर से साझा की गई रिपोर्ट्स में रिलायंस से जुड़ी कंपनियों के राजनीतिक चंदे और सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार से संबंधित पुराने दावे शामिल हैं। इनमें वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट का उल्लेख है, जिसमें रिलायंस से वित्तपोषित एक कंपनी की BJP के सोशल मीडिया प्रचार में भूमिका का दावा किया गया था। इसके अलावा, वर्ष 2024 में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी रिपोर्ट में रिलायंस से संबंधित कंपनी क्विक सप्लाई द्वारा BJP और शिवसेना को चंदा दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इन रिपोर्ट्स को साझा करते हुए मस्क ने भारत में स्टारलिंक को कारोबार शुरू करने में हो रही देरी के मुद्दे को भी उठाया है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली कारोबारी हितों के कारण उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। हालांकि, अंबानी या रिलायंस के खिलाफ अपने हालिया आरोपों को साबित करने के लिए मस्क ने इन पोस्ट में कोई नया ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया है।
इससे पहले मस्क ने अंबानी को संबोधित करते हुए सवाल किया था कि क्या वह स्टारलिंक को भारत में प्रतिस्पर्धा करने देना चाहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई इलाकों में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी है। मस्क के मुताबिक, सैटेलाइट इंटरनेट सेवा से ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है। ये मस्क के अपने दावे और तर्क हैं; इनके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में जानबूझकर रुकावट डाली गई है।
स्टारलिंक, मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क और जमीन पर बिछाए गए फाइबर केबल से अलग, सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। भारत में इस क्षेत्र में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसे बड़े कारोबारी समूह भी सक्रिय हैं। ऐसे में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत से सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने और व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया को लेकर नियामकीय सवाल भी चर्चा में हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। सरकार के अनुसार, सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस प्राप्त तीन कंपनियों को सुरक्षा संबंधी शर्तें और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद परिचालन शुरू करना होगा।
राजनीतिक चंदे और स्टारलिंक को कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलने के मुद्दे अलग-अलग हैं। किसी कंपनी या उससे जुड़ी इकाई द्वारा किसी राजनीतिक दल को चंदा दिए जाने की जानकारी अपने आप यह साबित नहीं करती कि उसी वजह से किसी प्रतिस्पर्धी कंपनी की सेवाओं को रोका गया है। इस विवाद में मस्क की ओर से उठाए गए सवालों और सरकारी पक्ष के बयानों को इसी अंतर के साथ देखना जरूरी है।
फिलहाल, मस्क की ताजा पोस्ट के बाद भारत के दूरसंचार बाजार, राजनीतिक चंदे और स्टारलिंक की लॉन्चिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर मस्क नियामकीय प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि सभी लाइसेंस प्राप्त कंपनियों को निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत कब होगी और इस विवाद पर रिलायंस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर आगे नजर रहेगी।
