सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 30 अक्टूबर का दिन राहत भरी खबर लेकर आया। घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। चांदी का भाव एक ही कारोबारी सत्र में करीब 5,400 रुपये प्रति किलो तक टूट गया, जबकि सोना भी करीब 1,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना कारोबार के दौरान करीब 1,41,177 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का दिसंबर वायदा भाव गिरकर करीब 1,84,050 रुपये प्रति किलो तक आ गया। कारोबार के दौरान चांदी में करीब 5,403 रुपये यानी 2.85 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अलग-अलग समय पर बाजार भाव में बदलाव होता रहा, इसलिए ये स्तर कारोबारी सत्र के दौरान दर्ज किए गए आंकड़े हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में महंगाई से जुड़े नए आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाएं हैं। अमेरिका में सितंबर के दौरान व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी PCE महंगाई सूचकांक में मासिक आधार पर 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यह मार्च के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि बताई गई है। महंगाई के दबाव ने बाजार में यह उम्मीद मजबूत की है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
ब्याज दरें बढ़ने की संभावना सोने और चांदी के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इन धातुओं को रखने पर निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब बैंक जमा और बॉन्ड जैसे विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ती है, तो निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे कीमती धातुओं की मांग और कीमतों पर दबाव पड़ता है।
अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। तीसरी तिमाही में अमेरिकी GDP की वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई लंबे समय तक ऊंची बने रहने का खतरा बढ़ा है। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण ऊर्जा कीमतों पर दबाव है। ऐसे हालात में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना कमजोर हुआ है। शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड करीब 1 प्रतिशत गिरकर 3,980 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया और जुलाई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर रहा। वहीं स्पॉट सिल्वर करीब 3.6 प्रतिशत टूटकर 50.50 डॉलर प्रति औंस तक आ गया। अक्टूबर महीने में दोनों धातुओं पर लगातार दबाव बना हुआ है और सोना लगातार दूसरे महीने गिरावट की ओर बढ़ रहा है।
चांदी की गिरावट की एक और वजह औद्योगिक मांग और आपूर्ति को लेकर बदलती तस्वीर भी है। चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। बाजार में उपलब्ध आपूर्ति बढ़ने और औद्योगिक खपत की रफ्तार कमजोर रहने की आशंका से भी कीमतों को सहारा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, भविष्य में इसकी मांग और आपूर्ति का संतुलन किस दिशा में जाता है, यह कीमतों के लिए अहम रहेगा।
विश्लेषकों के मुताबिक, फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। सोने के लिए MCX पर 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है, जबकि चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलो का दायरा चर्चा में है। ये बाजार विश्लेषकों के बताए तकनीकी स्तर हैं, पक्की कीमत या भविष्य की गारंटी नहीं। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखनी चाहिए।
