बिल गेट्स की बेटी फोएबे गेट्स के स्टार्टअप Phia को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब $30 मिलियन वैल्यूएशन वाले इस फैशन-टेक स्टार्टअप पर ‘कुकी स्टफिंग’ के जरिए कथित तौर पर ऑनलाइन एफिलिएट सिस्टम का गलत फायदा उठाने के आरोप लगे हैं।
फोएबे गेट्स ने अपनी दोस्त सोफिया कियानी के साथ 2025 में Phia नाम से एक एआई आधारित शॉपिंग प्लेटफॉर्म शुरू किया था। यह ऐप और ब्राउजर टूल ग्राहकों को अलग-अलग वेबसाइटों पर किसी उत्पाद की कीमतों की तुलना करने, डिस्काउंट कोड खोजने और सेकंड-हैंड फैशन आइटम के विकल्प देखने में मदद करता है। 2026 की शुरुआत में कंपनी ने $35 मिलियन की नई फंडिंग जुटाई थी और कुल निवेश लगभग $43.5 मिलियन तक पहुंच गया।
लेकिन अब Phia पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसके ब्राउजर एक्सटेंशन ने कई मामलों में उन ऑनलाइन बिक्री का भी क्रेडिट लेने की कोशिश की, जिन्हें उसने वास्तव में जनरेट नहीं किया था। आरोपों के अनुसार, एक्सटेंशन खरीदारी के दौरान बिना पर्याप्त यूजर इंटरैक्शन के अपना एफिलिएट ट्रैकिंग कोड डाल देता था। इस प्रक्रिया को ‘कुकी स्टफिंग’ कहा जाता है। इससे ऐसा दिख सकता है कि ग्राहक को खरीदारी के लिए Phia ने भेजा था और कंपनी को उस बिक्री पर एफिलिएट कमीशन मिल सकता था। जांच में यह व्यवहार कई रिटेल वेबसाइटों पर देखे जाने का दावा किया गया।
विवाद तब और गहरा गया जब बाद की रिपोर्टिंग में दावा किया गया कि कंपनी के आंतरिक Slack संदेशों से संकेत मिलता है कि इस तरह की कार्यप्रणाली की जानकारी फोएबे गेट्स और उनकी सह-संस्थापक सोफिया कियानी को पहले से हो सकती थी। यह दावा कंपनी के शुरुआती स्पष्टीकरण से अलग है, जिसमें इस समस्या को एक कोडिंग या सॉफ्टवेयर संबंधी गड़बड़ी बताया गया था। हालांकि इन आरोपों की कानूनी जिम्मेदारी या किसी अपराध की पुष्टि अभी किसी अदालत के फैसले से नहीं हुई है।
‘कुकी स्टफिंग’ डिजिटल एफिलिएट मार्केटिंग में एक विवादित और संभावित रूप से धोखाधड़ीपूर्ण तरीका माना जाता है। सामान्य तौर पर किसी कंपनी या वेबसाइट को तभी कमीशन मिलता है जब वह वास्तव में ग्राहक को किसी रिटेलर तक पहुंचाती है। लेकिन यदि किसी यूजर के ब्राउजर में बिना उसकी स्पष्ट कार्रवाई के एफिलिएट ट्रैकिंग कोड डाल दिया जाए और बाद में उस खरीदारी का कमीशन ले लिया जाए, तो इससे वास्तविक रेफरल देने वाले दूसरे पब्लिशर या कंपनी का कमीशन प्रभावित हो सकता है।
मामले के सामने आने के बाद Phia ने कथित तौर पर विवादित फीचर को हटाने की बात कही और गलत तरीके से उससे जुड़ी बिक्री या कमीशन को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने प्रभावित ट्रांजैक्शन को रिवर्स या रिकंसाइल करने और भविष्य में ऐसी समस्या रोकने के लिए अनुपालन से जुड़े कदम उठाने की बात भी कही है।
इस विवाद का असर कंपनी की साख पर भी पड़ सकता है। Phia ने खुद को एआई और तकनीक की मदद से स्मार्ट शॉपिंग का नया विकल्प बताकर तेजी से पहचान बनाई थी। फोएबे गेट्स का नाम जुड़ने के कारण भी कंपनी को शुरुआत से काफी मीडिया और निवेशकों का ध्यान मिला। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि कंपनी का एफिलिएट मॉडल कितना पारदर्शी था और क्या बिक्री से जुड़े आंकड़ों में गलत तरीके से क्रेडिट लिया गया।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कंपनी की आय पर इस विवादित फीचर का असर महत्वपूर्ण हो सकता था। फीचर हटाए जाने के बाद राजस्व में गिरावट आने के दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि कंपनी के पूरे वित्तीय रिकॉर्ड और आरोपों की अंतिम जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित प्रथा का वास्तविक आर्थिक प्रभाव कितना था।
फोएबे गेट्स और सोफिया कियानी की कंपनी के लिए यह विवाद ऐसे समय आया है, जब स्टार्टअप तेजी से विस्तार कर रहा था और बड़े निवेशकों का समर्थन हासिल कर चुका था। अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों, ब्रांड पार्टनर्स और ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने की है। एफिलिएट नेटवर्क और संबंधित कंपनियां भी इस मामले में अपने स्तर पर जांच और लेनदेन की समीक्षा कर रही हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि Phia पर ‘कुकी स्टफिंग’ और बिक्री का गलत क्रेडिट लेने के आरोप लगे हैं, लेकिन कानूनी रूप से दोष तय होना अभी बाकी है। कंपनी ने समस्या को दूर करने और गलत तरीके से जुड़े ट्रांजैक्शन की समीक्षा करने की बात कही है। आने वाले दिनों में जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई से ही साफ होगा कि इन आरोपों की पूरी सच्चाई क्या है और कंपनी तथा उसके संस्थापकों पर इसका कितना बड़ा असर पड़ता है।
