देश के शेयर बाजार में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक 1 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए, जबकि तीन दिनों के भीतर बाजार में हजारों अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई है, जो बाजार की कमजोर होती स्थिति को साफ दर्शाता है।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में आई भारी बिकवाली रही। Infosys, TCS और Tech Mahindra जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार आईटी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों और भविष्य के कमजोर ग्रोथ आउटलुक ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते इस सेक्टर में भारी दबाव देखने को मिला।
वैश्विक स्तर पर भी हालात बाजार के लिए अनुकूल नहीं रहे। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है। ऊंचे तेल दाम भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक संकेत माने जाते हैं और इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, रुपये में कमजोरी और वैश्विक बाजारों में गिरावट ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बनाया है। विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर कॉरपोरेट नतीजे और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा कम किया है, जिससे बाजार में लगातार गिरावट का माहौल बना हुआ है।
आईटी इंडेक्स में खास तौर पर 3-4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि टेक सेक्टर फिलहाल सबसे ज्यादा दबाव में है। कई कंपनियों के शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, महंगे कच्चे तेल, कमजोर नतीजे और आईटी सेक्टर की गिरावट ने मिलकर बाजार में बड़ी गिरावट पैदा की है। अब निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में वैश्विक हालात, कंपनियों के नतीजों और विदेशी निवेश के रुख पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि बाजार में आगे स्थिरता आएगी या गिरावट जारी रहेगी।
