
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए 2026 की शुरुआत राजनीतिक और कानूनी रूप से परेशानियों भरी साबित हो रही है। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय (charges framed) करने का बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत कुल 41 आरोपियों में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव सहित कई अन्य नाम शामिल हैं, जिन पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और साजिश से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है, जिसने आरोप लगाया है कि 2004-2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियाँ देने के नाम पर लोगों से जमीन ली गई और वह जमीन लालू परिवार या उनसे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर सस्ते दामों पर ट्रांसफर की गई। अदालत ने अपनी सुनवाई में कहा है कि जांच एजेंसी ने आरोपों के पक्ष में पर्याप्त प्राथमिक साक्ष्य (prima facie evidence) पेश किए हैं, जिससे यह माना गया कि एक संगठित साजिश के तहत यह योजना लागू की गई थी।
विशेष न्यायाधीश ने कोर्ट में कहा कि अभियुक्तों द्वारा पैसों या नौकरियों के बदले जमीन हासिल करने का तर्क केवल एक संयोग नहीं लगता, बल्कि यह एक संगठित और आपराधिक सिंडिकेट के रूप में किया गया कृत्य प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियुक्तों द्वारा आरोपों को खारिज करने की याचिकाएँ ठोस नहीं हैं और मामले की आगे की सुनवाई 23 जनवरी 2026 तक टाल दी गई है।
यह ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला राजनीति और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच काफी समय से सुर्खियों में रहा है। इस मामले का मूल आरोप यह है कि भर्ती प्रक्रिया का दुरुपयोग कर नौकरियाँ मिलने के बदले उम्मीदवारों से उनकी ज़मीनें ली गईं, जो बाद में लालू परिवार या उनके सहयोगियों के स्वामित्व में आ गईं। CBI की चार्जशीट में बताया गया है कि संपत्तियों का यह आदान-प्रदान बाज़ार के मूल्य से काफी कम दाम पर हुआ था, जिससे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
इससे पहले इस मामले में कई बार सुनवाई और अदालत के फैसलों में देरी होती रही है। 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने लालू यादव की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी, और सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रक्रिया को रोकने से इंकार कर दिया था। ऐसे में कोर्ट द्वारा आरोप तय करना इस लंबित विवाद में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर खासकर बिहार जैसी राजनीति-संवेदी स्थिति पर पड़ेगा, जहाँ राजद का प्रभाव और नेतृत्व की छवि महत्वपूर्ण है। लालू प्रसाद यादव, जिनका राजनीतिक करियर कई घोटालों और कानूनी लड़ाइयों से भरा रहा है, अब ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में आरोप तय होने के बाद अदालत के समक्ष आगे की लड़ाई लड़ेंगे। इस मामले की अगली तारीख पर सुनवाई और संभावित साक्ष्य पेश किए जाने के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।



