उत्तराखंड के बाद अब गुजरात भी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार को इस संबंध में गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है, जिससे राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने की प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस प्रस्तावित कानून को मौजूदा बजट सत्र में ही विधानसभा में पेश कर सकती है, जिससे गुजरात देश का दूसरा राज्य बन सकता है जहां UCC लागू होगा।
इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई ने की थी। समिति ने राज्यभर में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से चर्चा करने के बाद यह ड्राफ्ट तैयार किया है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, जिसमें धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नियम लागू होंगे।
ड्राफ्ट के अनुसार, शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। सबसे अहम प्रावधान यह है कि शादी और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इसके अलावा बहुविवाह (polygamy) पर पूरी तरह रोक लगाने और महिलाओं को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रस्ताव है। साथ ही हलाला जैसी प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, जो लंबे समय से विवाद का विषय रही हैं।
सरकार का कहना है कि यह कदम जेंडर इक्वलिटी और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है। इस कानून के जरिए महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने के साथ-साथ पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता और कानूनी स्पष्टता भी सुनिश्चित की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समाज में एकरूपता आएगी और कानूनी विवादों में कमी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट को 23 मार्च को विधानसभा में पेश किया जा सकता है और 24 मार्च को बिल लाने की तैयारी है। अगर यह कानून पास हो जाता है, तो यह राज्य की राजनीति और सामाजिक ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है।
हालांकि, UCC एक संवेदनशील और बहस का विषय भी रहा है। कुछ वर्गों का मानना है कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है, जबकि सरकार और समर्थक इसे समानता और आधुनिक कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, गुजरात में UCC लागू करने की तैयारी देश में एक नई कानूनी बहस को जन्म दे रही है। अब नजर विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी है, जहां इस प्रस्तावित कानून पर चर्चा के बाद इसकी दिशा तय होगी।
