विजय माल्या एक बार फिर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और उन्हें ‘भगोड़ा’ कहे जाने को लेकर चर्चा में हैं। ब्रिटेन में रह रहे माल्या ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के जरिए दावा किया कि वह अपनी इच्छा से भारत से दूर नहीं हैं, बल्कि ब्रिटेन की कानूनी पाबंदियों के कारण वहां से बाहर नहीं जा सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके खिलाफ इतनी बड़ी रकम की वसूली की जा चुकी है, तो उन्हें लगातार आर्थिक अपराधी और भगोड़े के तौर पर क्यों पेश किया जा रहा है।
माल्या ने अपने पोस्ट में भारतीय बैंकों से जुड़े कर्ज और वसूली का मुद्दा भी उठाया। उनका दावा है कि बैंकों और संबंधित एजेंसियों ने उनसे कुल 14,131.60 करोड़ रुपये की रकम वसूल की है, जबकि जिस कर्ज को लेकर कानूनी कार्रवाई हुई, उससे जुड़ी न्यायिक देनदारी करीब 6,203 करोड़ रुपये थी। माल्या का कहना है कि अगर वसूली मूल देनदारी से काफी ज्यादा हो चुकी है तो उन्हें राहत क्यों नहीं मिलनी चाहिए। यह दावा वह पहले भी सार्वजनिक रूप से कर चुके हैं।
माल्या ने अपनी स्थिति को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यह तक कहा कि क्या उनके लिए ‘भगोड़ा’ कहलाने के बजाय कॉकरोच बन जाना बेहतर होगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। माल्या का कहना है कि उन्हें जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर पेश किया जाता है, वह उनके साथ अन्याय है और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक तथा प्रचारात्मक रवैया अपनाया गया है।
माल्या ने यह भी दावा किया कि ब्रिटेन के कानूनी आदेशों के कारण वह देश छोड़कर भारत नहीं आ सकते। उनका तर्क है कि जब उनके ऊपर ब्रिटेन से बाहर जाने पर कानूनी रोक है, तो उन्हें ‘फरार’ या ‘भगोड़ा’ कहना उचित नहीं है। हालांकि, यह माल्या का अपना पक्ष है और भारत में उनके खिलाफ चल रही कानूनी एवं प्रत्यर्पण प्रक्रिया अलग से जारी है।
विजय माल्या का मामला कई सालों से भारतीय बैंकों के बकाया कर्ज और किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े वित्तीय मामलों के कारण चर्चा में रहा है। भारत सरकार उन्हें वापस लाने के लिए ब्रिटेन में प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ाती रही है। ब्रिटेन की अदालतों में उनके प्रत्यर्पण को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और 2020 में उनकी अंतिम अपील भी खारिज हो गई थी, हालांकि इसके बाद भी कुछ कानूनी मुद्दों के कारण प्रत्यर्पण लागू नहीं हो सका।
माल्या के ताजा बयान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि वह खुद को ‘आर्थिक अपराधी’ कहे जाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर बैंकों ने उनकी संपत्तियों और अन्य माध्यमों से बड़ी रकम वसूल कर ली है, तो वसूली और उनकी कानूनी स्थिति के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, उनके खिलाफ भारतीय अदालतों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई तथा प्रत्यर्पण की मांग केवल बैंक वसूली तक सीमित नहीं है।
माल्या का मामला उस दौर से जुड़ा है जब किंगफिशर एयरलाइंस पर भारी कर्ज जमा हुआ और कई भारतीय बैंकों ने बकाया रकम की वसूली के लिए कानूनी कदम उठाए। बाद में उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच भी हुई। इन आरोपों को लेकर माल्या लगातार अपना पक्ष रखते रहे हैं और खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
ताजा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब उनकी संपत्तियों से हुई वसूली और भारत वापस लाने की प्रक्रिया फिर चर्चा में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त की गई संपत्तियों से जुड़ी रकम में से 350 करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं माल्या लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब इतनी बड़ी रकम वसूल हो चुकी है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
हालांकि, माल्या के दावों को उनके व्यक्तिगत पक्ष के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके खिलाफ भारत में चल रही कानूनी प्रक्रिया और सरकार की प्रत्यर्पण संबंधी कोशिशें अलग विषय हैं। ऐसे में 14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली का आंकड़ा सामने रखकर खुद को पूरी तरह कानूनी विवाद से मुक्त बताना अपने आप में किसी अदालत के फैसले का विकल्प नहीं है।
फिलहाल विजय माल्या के नए बयान ने पुराने बैंक कर्ज और प्रत्यर्पण विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ माल्या वसूली की रकम, ब्रिटेन की कानूनी पाबंदियों और ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में उनके खिलाफ लंबित कानूनी प्रक्रिया और उन्हें वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। आने वाले समय में ब्रिटेन और भारत में चल रही कानूनी कार्यवाही ही इस पूरे मामले की अगली दिशा तय करेगी।
