सुप्रीम कोर्ट में आज (7 जनवरी 2026) आवारा कुत्तों से जुड़े विवादित मामले की फिर से सुनवाई शुरू हुई है, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि वह डॉग लवर्स (कुत्ता प्रेमियों) और डॉग हेटर्स (कुत्तों से नफरत रखने वालों) दोनों की दलीलों को सुनना चाहेगी। अदालत ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि कुत्ता कब काट सकता है यह किसी के दिमाग में नहीं पढ़ा जा सकता, इसलिए सभी पक्षों से विस्तार से बहस सुनना ज़रूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह भी बताया कि राजस्थान में पिछले दिनों आवारा जानवरों के कारण हुए दो गंभीर हादसों में एक जज गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिसके कारण उन्हें अभी तक ठीक होने में समय लग रहा है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि आज सभी पक्षों की बात विस्तार से सुनी जानी चाहिए — जिसमें कुत्तों के काटे जाने के शिकार, जानवर प्रेमी, और वे लोग जो इन कुत्तों को सड़कों पर रखना नहीं चाहते—सबका पक्ष शामिल है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों को नियमों के पालन की रिपोर्ट देनी चाहिए, लेकिन कुछ राज्यों ने अभी तक पिछले आदेशों पर अमल नहीं किया है। अदालत ने भी बताया कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने फाइल नहीं किया है। बेंच ने सुनवाई में यह स्पष्ट किया कि आज सबकी बात सुनी जाएगी, ताकि मामलों का संतुलित समाधान निकाला जा सके।
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिल्ली-NCR में आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए थे और इससे जुड़ी राजनीतिक तथा सामाजिक बहस शुरू हो गयी थी, जिसमें कई विरोध-प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप सामने आए।
