ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत की संस्कृति, सभ्यता और लोगों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें भारत भेजा जा रहा था, तब अयातुल्लाह अली खामेनेई ने उन्हें भारतीय समाज को करीब से समझने और देश के इतिहास का गहराई से अध्ययन करने की सलाह दी थी। इलाही के मुताबिक, खामेनेई भारतीयों को दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान मानते थे। उन्होंने भारत को न्याय, ज्ञान और करुणा की धरती बताते हुए यहां की सभ्यता से सीख लेने की बात कही थी।
डॉ. इलाही ने 25 अक्टूबर को आयोजित बातचीत में बताया कि खामेनेई की भारत में विशेष रुचि थी। उनके अनुसार, व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद खामेनेई ने भारत के इतिहास और सभ्यता पर 20 से अधिक पुस्तकें पढ़ी थीं। वह भारत को केवल एक देश नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक, बौद्धिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखते थे। इसी कारण उन्होंने अपने प्रतिनिधि को भारत की परंपराओं, समाज और इतिहास को गंभीरता से समझने की सलाह दी थी।
इलाही ने भारत आने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां के लोगों की आत्मीयता और मेहमाननवाजी ने उन्हें काफी प्रभावित किया। उन्होंने भारतीय समाज में परिवार, आपसी सम्मान और मानवीय संबंधों को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भारत में अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं और विविधता के बावजूद सामाजिक मेलजोल की भावना दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय समाज को ज्ञान और मानवीय मूल्यों से समृद्ध बताया।
ईरानी प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि भारत में रहने के दौरान उन्हें अपनापन महसूस हुआ। उनके अनुसार, भारतीयों का व्यवहार विनम्र और संवेदनशील है तथा यहां के लोग दूसरों का सम्मान करना जानते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में मिले स्नेह और सम्मान ने इस देश को उनके लिए खास बना दिया है। इलाही ने यह भी बताया कि ईरान में लोग उनके भारत में रहने को सम्मान की नजर से देखते हैं और इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता का एहसास होता है।
भारत और ईरान के संबंधों का उल्लेख करते हुए इलाही ने दोनों देशों की साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर जोर दिया। इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि भारत और ईरान के बीच संबंध लगभग 5,000 वर्ष पुराने हैं और दोनों देशों की सभ्यताओं में कई समानताएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने दोनों देशों को एक ही किताब के दो पन्नों की तरह बताते हुए कहा कि उनके बीच सहयोग और मित्रता की मजबूत ऐतिहासिक बुनियाद है।
इलाही ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, भारत के पास क्षेत्रीय मुद्दों को समझने का अनुभव और विभिन्न देशों के साथ संवाद करने की क्षमता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने में योगदान दे सकता है। उन्होंने ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका का भी उल्लेख किया।
भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, संस्कृति और ऐतिहासिक संपर्कों का लंबा रिश्ता रहा है। दोनों देशों के बीच प्राचीन काल से विचारों, भाषाओं और व्यापारिक गतिविधियों के आदान-प्रदान के प्रमाण मिलते हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भी दोनों देशों के संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। इलाही की टिप्पणियां इसी ऐतिहासिक निकटता और आपसी सम्मान को रेखांकित करती हैं।
डॉ. इलाही की इन बातों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और दोनों देशों के पुराने संबंधों को फिर चर्चा में ला दिया है। उनके अनुसार, भारत की सबसे बड़ी विशेषताओं में विभिन्न समुदायों का साथ रहना, ज्ञान की परंपरा और मानवीय रिश्तों को महत्व देना शामिल है। खामेनेई की ओर से भारत के इतिहास को समझने की सलाह का उनका यह उल्लेख दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को उजागर करता है।
