पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान के बीच यूपी कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। चुनाव आयोग द्वारा पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किए गए शर्मा सुबह से ही टीएमसी के मजबूत इलाकों में लगातार गश्त करते नजर आए, ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराया जा सके।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अजय पाल शर्मा खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। उन्हें ‘सिंघम’ और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के नाम से भी जाना जाता है, और उनकी सख्त कार्यशैली के कारण वे लगातार चर्चा में बने हुए हैं।
चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतों के बाद शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर किसी ने वोटरों को प्रभावित करने या धमकाने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, उनकी इस सक्रियता को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनकी तैनाती से चुनाव प्रभावित हो सकता है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में मजबूत कदम मान रहे हैं।
इस बीच, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिसमें उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग की गई है।
चुनावी माहौल के बीच अजय पाल शर्मा की सक्रियता ने बंगाल की राजनीति में नया तापमान ला दिया है। जहां एक ओर सुरक्षा एजेंसियां निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
