पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की। यह वार्ता 12 अक्टूबर की शाम हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के साथ भारत और ईरान के आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस बातचीत की जानकारी भारत में ईरानी दूतावास ने साझा की। हालांकि, बातचीत में किन विशिष्ट मुद्दों पर सहमति बनी, इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा की स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों पर हमलों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच बातचीत को कूटनीतिक संपर्क के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के केंद्र में होर्मुज स्ट्रेट भी है, जो वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और LNG व्यापार का आवागमन इसी रास्ते से होता था। इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और कई देशों की आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने हाल ही में कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के प्रस्ताव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया तेहरान की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान ने इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए सात शर्तें रखी थीं, जिनमें से कुछ पर अमेरिका की प्रतिक्रिया मिली, जबकि अन्य मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। ईरान ने कहा है कि आगे की प्रक्रिया इन शर्तों और उनसे जुड़े सवालों पर निर्भर करेगी।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। कतर और पाकिस्तान समेत कुछ देशों ने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने और तनाव कम करने के प्रयास किए हैं। हालांकि, समुद्री मार्ग को खोलने की शर्तों और बातचीत की प्राथमिकताओं पर मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल, इस प्रक्रिया में किसी निर्णायक समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालिया घटनाओं में भारतीय नाविकों को लेकर जा रहे व्यापारिक जहाजों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। भारत सरकार ने कुछ घटनाओं के बाद बचाव और तलाश अभियान से जुड़ी जानकारी साझा की है। ऐसे हालात में ईरान के साथ उच्चस्तरीय संपर्क समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर संवाद बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
भारत और ईरान के बीच बातचीत का महत्व दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों से भी जुड़ा है। ऊर्जा, व्यापार, संपर्क मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित जुड़े हुए हैं। पश्चिम एशिया में किसी बड़े संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा जरूरतों, व्यापारिक गतिविधियों और वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है। इसलिए क्षेत्रीय हालात पर नियमित कूटनीतिक बातचीत भारत के लिए अहम मानी जाती है।
फिलहाल, अजित डोभाल और मोहसिन रेजाई की बातचीत के बाद किसी विशेष समझौते या नई पहल की घोषणा नहीं हुई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तथा आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की। अब पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी बातचीत और भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम पर आगे की नजर रहेगी।
