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आकाश आनंद ने योगी सरकार पर साधा निशाना, अखिलेश और राहुल गांधी को बताया ‘अंकल’

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर और मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने लंबे अंतराल के बाद चुनावी मंच से अपनी सक्रिय राजनीति की शुरुआत की। हाथरस के सादाबाद में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। अपने भाषण में आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर तंज भी कसा।

आकाश आनंद ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश सरकार के पिछले 10 साल के कामकाज पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए विज्ञापनों और प्रचार पर ज्यादा जोर देती रही है। उनका दावा था कि जनता के टैक्स से मिले पैसे का इस्तेमाल सरकार की उपलब्धियों के प्रचार में किया गया, जबकि दूसरी तरफ रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे अभी भी गंभीर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब जनता के सामने सरकार के 10 साल के कामकाज का हिसाब मांगने का समय आ गया है।

आकाश आनंद ने दावा किया कि सरकार के पास बड़ी संख्या में खाली सरकारी पदों को भरने के लिए पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि यदि सरकार प्रचार पर खर्च होने वाले पैसे का इस्तेमाल परीक्षाओं और रोजगार के क्षेत्र में करती तो युवाओं को इसका लाभ मिल सकता था। उन्होंने रोजगार को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं के सामने नौकरी का संकट बना हुआ है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

अपने भाषण के दौरान आकाश आनंद ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी योगी सरकार को घेरा। उन्होंने महिला सुरक्षा, अपराध, हत्या और अपहरण से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के दावों पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की नीति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

शिक्षा के मुद्दे पर भी आकाश आनंद ने सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का दावा करते हुए कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे सीधे तौर पर युवाओं और आम परिवारों के भविष्य से जुड़े हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आकाश आनंद ने अपने भाषण में राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी को ‘राहुल अंकल’ और अखिलेश यादव को ‘अखिलेश अंकल’ कहकर संबोधित किया। अखिलेश यादव को लेकर उन्होंने कहा कि वह करीब 30 साल के हैं, जबकि अखिलेश यादव उनसे उम्र में काफी बड़े हैं, इसलिए उन्हें अंकल कहना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह अखिलेश यादव का नाम सम्मान के साथ ले रहे हैं।

कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए आकाश आनंद ने आरोप लगाया कि केवल सरकार बदलने से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी की जगह कांग्रेस को सत्ता में लाया जाता है तो भी स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव जरूरी नहीं है। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर राजनीतिक मुद्दों तथा भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल उठाए और कहा कि जनता को किसी भी पार्टी से केवल वादों के बजाय काम का हिसाब मांगना चाहिए।

आकाश आनंद ने कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिय होने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनाव करीब आने के साथ राजनीतिक दल एक बार फिर जनता के सामने वादे लेकर आएंगे, लेकिन मतदाताओं को पिछले वर्षों के काम का हिसाब लेना चाहिए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश करते हुए पार्टी के चुनाव चिन्ह पर मतदान करने की अपील भी की।

आकाश आनंद की यह वापसी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। लंबे समय बाद चुनावी मंच पर उनकी सक्रिय मौजूदगी को बहुजन समाज पार्टी की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाथरस से अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने जिस तरह एक साथ भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को निशाने पर लिया, उससे साफ संकेत मिलता है कि बसपा आने वाले चुनाव में अपनी अलग राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करेगी।

आगामी चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति में रोजगार, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, महंगाई, सरकारी भर्तियां और सामाजिक मुद्दे अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में आकाश आनंद का आक्रामक भाषण बसपा की चुनावी रणनीति की दिशा का संकेत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में वह प्रदेश के दूसरे हिस्सों में कितनी सक्रियता के साथ अभियान चलाते हैं और क्या उनकी रणनीति बसपा के जनाधार को दोबारा मजबूत करने में सफल होती है।

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