Site icon Prsd News

‘फेक नोटों के पीछे बीजेपी का हाथ’—अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, यूपी में सियासत तेज

download 3 3

उत्तर प्रदेश में नकली नोटों के मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे “फेक नोट नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड” करार दिया है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।

दरअसल, हाल ही में यूपी में नकली नोटों के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था, जिसके बाद सपा और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस पूरे मामले में सत्तारूढ़ दल के लोगों की संलिप्तता सामने आ रही है और यही वजह है कि कार्रवाई में देरी हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरोपियों के संबंध भाजपा नेताओं से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं, तो जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि “भाजपाई नकली नोट देश में चला रहे हैं और असली नोट बाहर भेज रहे हैं।” उन्होंने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए सरकार पर गंभीर लापरवाही और मिलीभगत का आरोप लगाया।

वहीं, भाजपा की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। पार्टी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि यह पूरा मामला सपा से जुड़े लोगों का है और अखिलेश यादव ध्यान भटकाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे विवाद के बीच पुलिस ने नकली नोट गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से बड़ी मात्रा में जाली नोट, प्रिंटिंग मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के तार किन-किन लोगों तक जुड़े हैं और क्या इसमें किसी राजनीतिक संरक्षण की भूमिका रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब यूपी में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरम हो रहा है। नकली नोटों का मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि अब राजनीतिक हथियार बन चुका है, जहां दोनों दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

कुल मिलाकर, फेक करेंसी का यह मामला यूपी की राजनीति में बड़ा विवाद बनता जा रहा है, जिसमें सच्चाई सामने आने से पहले ही सियासी बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

Exit mobile version