ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने का फैसला लिया गया था। चौहान के मुताबिक, सरकार ने सेना को कार्रवाई के लिए पूरी स्वतंत्रता दी थी, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ऑपरेशन में किसी तरह की विफलता नहीं होनी चाहिए और कार्रवाई के ठोस सबूत भी होने चाहिए।
जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुख और तत्कालीन CDS सहित शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद था। इस बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा हुई। चौहान के अनुसार, बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारत सीमा पार आतंकवाद को स्वीकार नहीं कर सकता और पाकिस्तान को एक बड़ा सबक सिखाना जरूरी है।
पूर्व CDS के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने सैन्य नेतृत्व को कार्रवाई का समय खुद तय करने की स्वतंत्रता दी। यानी सेना को यह तय करना था कि ऑपरेशन कब और किस तरीके से किया जाए। हालांकि, इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी थी कि कार्रवाई में असफलता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए और हमले के बाद ऐसे प्रमाण मौजूद होने चाहिए, जिन्हें दुनिया के सामने रखा जा सके। इस निर्देश ने ऑपरेशन की योजना में सटीकता, गोपनीयता और प्रमाण जुटाने को महत्वपूर्ण बना दिया।
चौहान ने यह भी बताया कि 23 अप्रैल से ही सरकार ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर उठाए जाने वाले कदमों को लेकर निर्णय लेने शुरू कर दिए थे। इसके बाद 29 अप्रैल की बैठक में मुख्य रूप से सैन्य विकल्प पर चर्चा हुई। चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी ने कई दौर की बैठकें कीं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार किया। इसके बाद सरकार के सामने अलग-अलग विकल्प रखे गए और ऑपरेशन की अंतिम रूपरेखा तैयार हुई।
ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों को लेकर भी जनरल चौहान ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी ढांचे को लक्ष्य सूची में शामिल करना बेहद महत्वपूर्ण फैसला था। उनके मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जोर देने पर बहावलपुर के लक्ष्य को सूची में शामिल किया गया। यह लक्ष्य काफी अंदर होने के कारण केवल ड्रोन या लोइटरिंग म्यूनिशन से वहां तक पहुंचना पर्याप्त नहीं था, इसलिए वायु शक्ति का इस्तेमाल करना आवश्यक हो गया।
भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद 9 आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। इनमें मुरीदके और बहावलपुर स्थित आतंकी ठिकाने भी शामिल थे। भारतीय पक्ष के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य पहलगाम हमले के पीछे मौजूद आतंकी नेटवर्क और उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना था।
जनरल चौहान ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं और उसकी खुफिया जानकारी को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान को भारतीय नौसेना की वास्तविक स्थिति का सही अंदाजा नहीं था। उनके अनुसार, पाकिस्तान की ओर से भारतीय कैरियर बैटल ग्रुप की स्थिति के बारे में जो अनुमान लगाए गए थे, वे वास्तविक स्थान से काफी दूर थे। उन्होंने इसे पाकिस्तान की समुद्री खुफिया जानकारी की कमजोरी के तौर पर बताया।
ऑपरेशन के दौरान सीजफायर को लेकर भी जनरल चौहान ने अमेरिकी मध्यस्थता के दावों पर स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी DGMOs के बीच हुई बातचीत से हुआ था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच संपर्क हुआ और बातचीत के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। चौहान के इस बयान से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठे हैं कि अमेरिका के दबाव के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष समाप्त हुआ।
पूर्व CDS ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के परमाणु प्रतिष्ठानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विवाद पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य पाकिस्तान के किराना हिल्स स्थित कथित परमाणु ढांचे को निशाना बनाना नहीं था। उनके अनुसार, एक लोइटरिंग म्यूनिशन रडार से जुड़े लक्ष्य की तलाश में था और संभवतः ईंधन खत्म होने या अन्य परिस्थितियों के कारण वह किराना हिल्स क्षेत्र में जा गिरा। इसलिए यदि वहां कोई प्रभाव पड़ा भी था, तो वह जानबूझकर किया गया हमला नहीं था।
जनरल चौहान की इन जानकारियों से ऑपरेशन सिंदूर की योजना के पीछे मौजूद राजनीतिक और सैन्य तालमेल की तस्वीर सामने आती है। उनके मुताबिक, सरकार ने राजनीतिक स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य तय किया, जबकि सैन्य नेतृत्व को कार्रवाई का तरीका और समय चुनने की स्वतंत्रता दी गई। इससे ऑपरेशन की योजना में राजनीतिक निर्देश और सैन्य निर्णय लेने की स्वतंत्रता के बीच संतुलन दिखाई देता है।
ऑपरेशन सिंदूर के करीब 1 साल बाद पूर्व CDS की ओर से सामने आई ये जानकारियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें पहली बार शीर्ष सैन्य नेतृत्व के स्तर पर उस बैठक और फैसले की अंदरूनी तस्वीर सामने आई है, जिसने भारत की जवाबी कार्रवाई की दिशा तय की थी। पहलगाम हमले के बाद भारत ने कूटनीतिक और आर्थिक कदमों के साथ सैन्य विकल्प पर भी काम किया और आखिरकार 7 मई को आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि भारत ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया को पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट और निर्णायक बनाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री की ओर से कार्रवाई के लिए स्वतंत्रता, लक्ष्य की सटीक पहचान और सबूत जुटाने पर जोर ने ऑपरेशन की रणनीति को आकार दिया। अब उनके ताजा खुलासे ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
