बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर एक बार फिर अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। राम मंदिर और मुगलों को लेकर दिया गया उनका बयान तेजी से वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें जमकर ट्रोल भी किया। विवाद बढ़ने के बाद अनुपम खेर ने ट्रोलिंग पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि वह अपनी बात पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ रखते हैं और केवल आलोचना के डर से अपने विचार बदलने वाले नहीं हैं।
अनुपम खेर ने कहा कि इतिहास, संस्कृति और अपनी आस्था से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना चाहिए, न कि कुछ सेकंड की वायरल क्लिप के आधार पर निष्कर्ष निकालना चाहिए। उनके अनुसार सोशल मीडिया पर अक्सर किसी भी बयान का एक छोटा हिस्सा वायरल कर दिया जाता है, जिससे गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं और वास्तविक संदेश लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
अभिनेता ने ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी बात तथ्यों और ईमानदारी के साथ रखता है तो उसे आलोचनाओं से घबराने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार होना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और अपमानजनक टिप्पणियां किसी भी स्वस्थ बहस का हिस्सा नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह भविष्य में भी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहेंगे।
हाल के दिनों में अनुपम खेर अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचे थे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना भी की थी। इस दौरान उन्होंने मंदिर से जुड़े विवादों पर भी अपनी राय रखते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की गलती का दोष किसी धार्मिक स्थल या आस्था पर नहीं मढ़ा जाना चाहिए। उनके इस बयान को भी काफी चर्चा मिली थी और अब राम मंदिर एवं मुगलों से जुड़ी उनकी टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है।
सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर बहस लगातार जारी है। एक वर्ग का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को संवेदनशील विषयों पर संतुलित भाषा का प्रयोग करना चाहिए, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अपने विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है। फिलहाल अनुपम खेर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ट्रोलिंग से प्रभावित नहीं हैं और अपने विचारों को लेकर पहले की तरह बेबाक रहेंगे। उनके बयान के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, इतिहास और सामाजिक विमर्श जैसे मुद्दे चर्चा में आ गए हैं।
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