Site icon Prsd News

आरसीबी के तेज गेंदबाज़ यश दयाल को बड़ा झटका: जयपुर की POCSO कोर्ट ने अग्रिम बांड याचिका खारिज की, गिरफ्तारी की संभावना बढ़ी

download 4 13

आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) के प्रमुख तेज गेंदबाज़ यश दयाल को एक बड़े कानूनी झटके का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि जयपुर की विशेष POCSO कोर्ट-3 ने उनकी अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिका को आज खारिज कर दिया है। इससे अगले कुछ दिनों में उनकी गिरफ्तारी की संभावना और बढ़ गई है, क्योंकि अदालत ने प्रथम दृष्टया गंभीर आरोपों का उल्लेख करते हुए संरक्षण याचिका को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया है। इस आदेश के साथ ही यश दयाल के लिए न्यायिक प्रक्रिया और कठिन हो गई है, और यह उनके खेल करियर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

मामला 23 जुलाई 2025 को जयपुर के सांगानेर सदर थाने में दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यश दयाल ने एक नाबालिग लड़की को क्रिकेट में करियर बनाने का झांसा देकर और भावनात्मक दबाव बनाकर करीब ढाई साल तक कथित रूप से शारीरिक शोषण किया। पुलिस ने जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी दोनों के मोबाइल से कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट, वीडियो, और होटल में ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जो मामले की गंभीरता को बढ़ाते हैं।

जस्टिस अलका बंसल ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोप झूठे नहीं हैं, और अभी तक जांच जारी है। इसलिए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं माना गया। अदालत का यह निर्णय यश दयाल के लिए एक बड़ा कानूनी सपाट झटका रहा है, क्योंकि अब उन्हें स्वीकार्य सुरक्षा नहीं मिलने से संभवतः पुलिस हिरासत का सामना करना पड़ सकता है।

इससे पहले यश दयाल के वकील ने दलील दी थी कि बातचीत सार्वजनिक जगहों पर हुई, पीड़िता ने खुद को वयस्क बताया, और उन्होंने आरोपों को हिरासत या फ़ंसाने की साजिश बताया। इसके बावजूद अदालत ने मामला गंभीरता से लिया और अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

यह मामला क्रूरता से बढ़ता जा रहा है क्योंकि यश दयाल अभी आईपीएल 2026 के लिए आरसीबी द्वारा रिटेन किए गए हैं, लेकिन इस कानूनी उलझन के कारण उनके खेलने की स्थिति संदेह में है। पिछले कुछ समय में पहले भी उनके खिलाफ एक अन्य मामला गाज़ियाबाद में दर्ज किया गया था, जिसमें भी गंभीर आरोप लगे थे और अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक नहीं दी थी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार POCSO अधिनियम के तहत आरोपित व्यक्ति को अग्रिम जमानत देना न्यायव्यवस्था में तभी संभव है जब सबूतों के आधार पर भ्रांति स्पष्ट हो, और फिलहाल कोर्ट ने यह नहीं माना। ऐसे मामलों में न्यायालय पीड़िता के हित और सबूतों के महत्व को देखते हुए कार्रवाई करता है।

अब यह देखना होगा कि आगामी सुनवाई में क्या मोड़ आता है और क्या यश दयाल को अदालत से कोई राहत मिलती है या नहीं। इस बीच सामाजिक और खेल जगत में भी इस फैसले पर गहरी टिप्पणियाँ और बहस जारी है, क्योंकि एक खिलाड़ी के करियर और प्रतिष्ठा पर लगे आरोपों और उनके कानूनी परिणामों का व्यापक प्रभाव होता है।

Exit mobile version