Site icon Prsd News

प्रधानमंत्री मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया, मोरान हाईवे को रनवे में बदला गया

download 4 6

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के **डिब्रूगढ़ जिले में मोरान बायपास पर बनी पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility – ELF) का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से ऐतिहासिक लैंडिंग कर इस नई सुविधा को औपचारिक रूप से शुरू किया, जो देश के रक्षा ढांचे, आपदा प्रबंधन और नागरिक विमान सेवाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

यह सुविधा राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के मोरान बायपास पर 4.2 किलोमीटर की मजबूत सड़क संरचना के रूप में विकसित की गई है, जिसे विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में हवाई जहाजों के लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए तैयार किया गया है। यह सुविधा न केवल सैन्य उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं या गंभीर हवाई आपात स्थितियों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है, जिससे भारी विमानों की तैनाती और राहत प्रयासों को तेज़ी से संभव किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने पीएम मोदी को परंपरागत असमिया सम्मान (जापी और मुणगा गमोसा) से नवाज़ा और समारोह में भाग लिया।

स्थानीय समयानुसार दोपहर में लैंडिंग के बाद प्रधानमंत्री ने वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों की शानदार हवा शो का भी निरीक्षण किया, जिसमें सु-30, राफेल और ट्रांसपोर्ट विमान जैसे 16 से अधिक विमानों ने उड़ान प्रदर्शन किया और मोरान ELF पर लैंडिंग-टेक-ऑफ सहित कई अभ्यास दिखाए। इस शो ने न केवल भारतीय वायुसेना की सामरिक क्षमताओं को प्रदर्शित किया, बल्कि नई लैंडिंग फैसिलिटी की विश्वसनीयता को भी स्थापित किया।

ELF परियोजना लगभग ₹100 करोड़ की लागत से विकसित की गई है और यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहली हाईवे-आधारित रनवे सुविधा बन गई है, जो किसी भी संकट या आपदा के समय विमान संचालन को सक्षम करेगी। इससे रक्षा तैनाती, मानवीय राहत अभियानों और सिविल एविएशन जरूरतों के दौरान भारत की तैयारी और उत्तरदायित्व क्षमता मजबूत होगी।

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मोरान ELF का निर्माण सिर्फ आपातकालीन लैंडिंग सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का भी एक अहम हिस्सा है, विशेष रूप से चीन के साथ सीमा स्थितियों और चुस्त-दुरुस्त सैन्य तैयारियों के संदर्भ में। इससे पूर्वोत्तर भारत की रणनीतिक गहराई और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री की आज की यात्रा का यह हिस्सा ‘गति-शक्ति’ और ‘विकसित पूर्वोत्तर’ जैसे सरकारी प्रयासों का प्रतीक भी है, जिसमें बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मोदी ने कहा कि यह सुविधा न सिर्फ़ असम बल्कि पूरे देश के लिए “एक नया युग” खोलेगी, जिसमें सुरक्षा, गतिशीलता और आपदा प्रबंधन में नई क्षमताएँ विकसित की जाएंगी।

Exit mobile version