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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुनसान इलाके में होती थीं आरोपियों की गुप्त बैठकें, वहीं बंटती थी कथित रकम

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अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि इस पूरे मामले में शामिल आरोपी मंदिर परिसर से कथित रूप से निकाली गई रकम को आपस में बांटने के लिए शहर के बाहरी हिस्से में स्थित एक सुनसान स्थान का इस्तेमाल करते थे। बताया जा रहा है कि यह जगह अयोध्या-लखनऊ हाईवे के समीप 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के आसपास स्थित है, जहां आरोपियों की नियमित बैठकों का सिलसिला चलता था।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि आरोपी भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचते हुए एकांत स्थानों पर मिलते थे, ताकि किसी को उनकी गतिविधियों की भनक न लगे। इसी स्थान पर कथित तौर पर चोरी की गई राशि का हिसाब-किताब तैयार किया जाता था और फिर रकम का बंटवारा किया जाता था। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस स्थान से जुड़े साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहा है। आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित तौर पर प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल किन-किन कार्यों में किया गया। अधिकारियों का मानना है कि जांच के दायरे में आने वाले तथ्यों से इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विस्तृत खुलासा हो सकता है।

इस प्रकरण ने श्रद्धालुओं और आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यही कारण है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग लगातार उठ रही है। ट्रस्ट और प्रशासनिक स्तर पर भी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए उपायों पर विचार किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी खुलासे हो सकते हैं। पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर कई अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। फिलहाल अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अर्पित की गई धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ हो तथा भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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