
मध्य-पूर्व में जारी ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने अपनी वायुसेना की सबसे घातक ताकत मैदान में उतार दी है। अमेरिकी सेना ने एक साथ तीन रणनीतिक बॉम्बर्स—B-1 लैंसर, B-2 स्पिरिट और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस—को तैनात कर ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल ठिकानों और तेल सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हमले तेज कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इन तीनों बॉम्बर्स की संयुक्त रणनीति ने युद्ध का संतुलन बदल दिया है और ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली पर भारी दबाव पैदा कर दिया है। अमेरिका इन विमानों के जरिए लंबी दूरी से सटीक बमबारी कर रहा है, जिससे ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने निशाने पर आ गए हैं।
इस अभियान में सबसे ज्यादा चर्चा B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस की हो रही है, जिसे अमेरिकी वायुसेना का सबसे पुराना लेकिन बेहद भरोसेमंद रणनीतिक बॉम्बर माना जाता है। यह विमान करीब 14,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और लगभग 70,000 पाउंड (31 हजार किलोग्राम से ज्यादा) हथियार ले जाने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इसे लंबी दूरी से भारी बमबारी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस बॉम्बर ने ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और कमांड-कंट्रोल सेंटरों को निशाना बनाया है।
दूसरी ओर B-1 लैंसर को अमेरिका का तेज रफ्तार हमला करने वाला बॉम्बर माना जाता है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ान भर सकता है और कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता रखता है। इस विमान की खासियत इसका वेरिएबल-स्वीप विंग डिजाइन है, जिससे यह उड़ान के दौरान अपने पंखों की स्थिति बदल सकता है और तेजी से लक्ष्य पर हमला कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार इस बॉम्बर का इस्तेमाल ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए किया गया है।
तीसरा और सबसे खतरनाक विमान B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर माना जाता है। इसकी स्टेल्थ तकनीक इसे रडार से लगभग अदृश्य बना देती है, जिससे यह दुश्मन के घने एयर डिफेंस सिस्टम को पार कर गहरे अंदर तक हमला कर सकता है। यह विमान भूमिगत बंकरों और संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है और इसमें परमाणु तथा पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने की क्षमता होती है। बताया जा रहा है कि इस युद्ध में शुरुआती हमलों में B-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अहम सैन्य और मिसाइल ढांचे को निशाना बनाया।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इन तीनों बॉम्बर्स को अलग-अलग भूमिकाओं में इस्तेमाल कर रहा है—B-52 भारी और लंबी दूरी की बमबारी करता है, B-1 तेज और लगातार हमले करता है, जबकि B-2 स्टेल्थ तकनीक के साथ सबसे सुरक्षित और संवेदनशील लक्ष्यों को नष्ट करता है। इस संयुक्त रणनीति से अमेरिका को हवाई बढ़त मिली है और ईरान की कई मिसाइल फैक्ट्रियों, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है।
मौजूदा हालात में यह तिकड़ी अमेरिकी हवाई ताकत का प्रतीक बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो इन रणनीतिक बॉम्बर्स की भूमिका और भी अहम हो सकती है। इससे न सिर्फ ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ेगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।


