Advertisement
लाइव अपडेटविश्व
Trending

भारत की चिंताओं को खारिज करता बांग्लादेश

Advertisement
Advertisement

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक नया विवाद उभरा है, जिसमें भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों के खिलाफ जारी “लगातार होस्टिलिटी (हमलावर व्यवहार)” पर गहरी चिंता जताई है, लेकिन बांग्लादेश सरकार ने इस चिंता को तथ्यहीन और भ्रामक बताकर स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि हाल के अत्याचार, जिनमें हाल ही में म्यमेंसिंग में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा हत्या शामिल है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार होस्टिलिटी” का संकेत देते हैं और इसे गंभीर चिंता के विषय के रूप में देखा जाना चाहिए। भारतीय अधिकारियों ने दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लेकिन ढाका में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से खारिज किया और कहा कि ये टिप्पणियाँ “वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करतीं” और “अलग-अलग आपराधिक घटनाओं” को **संगठित धार्मिक उत्पीड़न के रूप में प्रस्तुत करना **असत्य और भ्रामक है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों को भारत में नकारात्मक और बांग्लादेश विरोधी भावना फैलाने के लिए उपयोग किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में उनके देश में सांप्रदायिक सद्भाव का एक लंबा इतिहास रहा है

ढाका की तरफ से यह भी कहा गया कि भारत द्वारा उद्धृत कुछ घटनाओं में विवरण गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं, जैसे कि एक हत्या के मामले में संबंधित व्यक्ति को एक अपराधी बताया गया, जिसकी मौत एक अलग आपराधिक घटना के दौरान हुई थी न कि धार्मिक आधार पर हिंसा का परिणाम। बांग्लादेश सरकार ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा का कोई सबूत नहीं है और ऐसे कथनों को फैलाना दो देशों के बीच अच्छे पड़ोसी संबंधों और भरोसे को नुकसान पहुँचा सकता है

भारत की चिंता अतीत के कुछ रिपोर्टों और मानवाधिकार समूहों द्वारा दर्ज मामलों पर आधारित है, जिनमें यह दर्शाया गया है कि जून से दिसंबर 2025 तक धार्मिक बहस से जुड़ी कम से कम 71 घटनाएं हुईं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले और भीड़ हिंसा के मामले शामिल हैं। इन रिपोर्टों ने यह संकेत दिया है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, और भारत ने इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कहा।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस विवाद ने पहले से ही पेचीदा भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया तनाव उत्पन्न कर दिया है और यह सीमापार मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक संवाद के मुद्दों को और गहरा कर सकता है। दोनों देशों के बीच अगर यह मसला कूटनीतिक प्लेटफॉर्म पर हल नहीं हुआ, तो यह क्षेत्रीय सहयोग और विश्वास पर असर डाल सकता है।

दोनों सरकारों की राय में यह स्पष्ट मतभेद है — भारत इसे गंभीर व्यवहार की एक श्रृंखला के रूप में देखते हुए न्याय और सुरक्षा की मांग कर रहा है, जबकि बांग्लादेश इसे “चयनात्मक, भ्रामक और अलग-अलग घटनाओं” के रूप में खारिज कर रहा है। इस पूरे विवाद ने न केवल भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संवाद की जरूरत को अहम बनाया है बल्कि पूर्वी क्षेत्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर वैश्विक समुदाय की भी निगाहें टिकाई हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share