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बांग्लादेश में BNP की मजबूत जीत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया विवाद — शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर पॉलिटिकल तथा कूटनीतिक बहस तेज़

BANGALDESH

बांग्लादेश में Tarique Rahman की अगुवाई वाली Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने हाल के आम चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल कर सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस राजनीतिक बदलाव ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर भी सीधा असर डाला है और एक बड़ा मुद्दा सुर्खियों में है — **पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina का प्रत्यर्पण।

BNP के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे भारत में शेख हसीना के खिलाफ कानूनी प्रक्रियाओं के तहत प्रत्यर्पण की मांग करेंगे, क्योंकि हसीना को बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। ढाका ने औपचारिक रूप से भारत को प्रत्यर्पण के लिए निवेदन पत्र भी भेजा है और BNP इसके समर्थन में है। हालांकि BNP के अध्यक्ष तारिक रहमान ने बताया कि प्रत्यर्पण का निर्णय “कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा”, जिसका अर्थ है कि यह मामला न्यायिक और द्विपक्षीय कानूनी ढाँचे के अधीन होगा।

BNP के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने यह भी कहा है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए बाधा नहीं बनेगी,  और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित संवाद तथा सहयोग जारी रह सकता है। वे कहते हैं कि दोनों पक्षों के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के तहत यह मामला सुलझाया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा दीर्घकालिक तौर पर द्विपक्षीय संपर्कों और विश्वास को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब BNP सरकार भारत के साथ “रीसेट” की मांग कर रही है ताकि संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाया जा सके। BNP के विदेश नीति सलाहकार ने भी यह संकेत दिया है कि भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को पिछले 15 वर्षों की कड़वाहट से अलग करके गंभीर रूप से फिर से प्रारंभ करने की आवश्यकता है।

इस बीच भारत के उच्चस्तरीय नेताओं ने तारिक रहमान की जीत पर बधाई दी है और दोनों देशों के बीच शांति, विकास और सहयोग की भावना को कायम रखने की इच्छा जताई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दिल्ली और ढाका दोनों ही राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कूटनीतिक संपर्क को महत्व दे रहे हैं.

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