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बारामती उपचुनाव 2026: वोटिंग से पहले सुनेत्रा पवार भावुक, बोलीं—‘अजित दादा के बिना पहली बार चुनाव’

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महाराष्ट्र के बारामती विधानसभा उपचुनाव 2026 में मतदान के दिन भावनात्मक और राजनीतिक दोनों ही माहौल देखने को मिला। इस उपचुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने वोटिंग से पहले एक भावुक बयान दिया, जिसने पूरे चुनावी माहौल को संवेदनशील बना दिया। उन्होंने कहा कि यह चुनाव पहली बार उनके पति और वरिष्ठ नेता अजित पवार के बिना हो रहा है, जिससे यह मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी बन गया है। सुनेत्रा पवार ने बारामती की जनता से अपील करते हुए कहा कि लोग अपने “अजित दादा” के काम और उनके योगदान को याद रखते हुए मतदान करें और यह चुनाव उनके लिए एक श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।

सुनेत्रा पवार ने यह भी कहा कि बारामती की जनता पिछले करीब 60 वर्षों से पवार परिवार के साथ खड़ी रही है और हर परिस्थिति में समर्थन दिया है। उनके अनुसार इस बार भी मतदाता बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंच रहे हैं और कई लोग खासतौर पर बाहर से अपने क्षेत्र में वोट डालने के लिए लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव अब केवल उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि जनता का चुनाव बन चुका है, जहां लोग खुद आगे बढ़कर अपने नेता के प्रति सम्मान और विश्वास दिखा रहे हैं।

इस उपचुनाव की खास बात यह भी है कि यह अजित पवार के निधन के बाद हो रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में भावनात्मक जुड़ाव काफी गहरा हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव पवार परिवार की विरासत और उनके राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा माना जा रहा है। सुनेत्रा पवार ने लोगों से विकास के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए वोट देने की अपील की और कहा कि उनके पति ने वर्षों तक क्षेत्र के लिए काम किया है, जिसे आगे बढ़ाना अब जनता और उनके नेतृत्व की जिम्मेदारी है।

इसके अलावा, उन्होंने यह जानकारी भी दी कि वरिष्ठ नेता शरद पवार खराब स्वास्थ्य के कारण इस बार मतदान में शामिल नहीं हो पाएंगे, हालांकि उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमेशा उनके साथ है। शरद पवार ने भी जनता के नाम संदेश भेजकर अपनी अनुपस्थिति पर दुख जताया और लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की।

कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव 2026 केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक परिवार, विरासत और भावनाओं से जुड़ा चुनाव बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता किस तरह इस भावनात्मक अपील और विकास के मुद्दों के बीच अपना फैसला सुनाती है।

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