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“असम के कांग्रेस नेता भूपेन कुमार बोरा ने इस्तीफा दिया, आज रात अंतिम निर्णय लेंगे, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के घर मिलने का न्योता”

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असम के पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में तहलका मचा दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण समय में कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारे हलचल में हैं। बोरा ने कहा है कि वह “आज रात अपना अंतिम फैसला” लेंगे कि वह इस्तीफा वापस लें या आगे की राह चुनें, क्योंकि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा उनके घर आने और उनसे मिलकर बातचीत करने का प्रस्ताव दे चुके हैं।

भूपेन बोरा ने कांग्रेस के लिए 32 साल काम किया है और उन्होंने सदन व पार्टी में लंबे समय तक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी पार्टी से इस्तीफा इसलिए देने का निर्णय लिया क्योंकि उन्होंने महसूस किया कि पार्टी आलाकमान में उनकी उपेक्षा हो रही है और उन्हें सही मान नहीं दिया जा रहा है। बोरा ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि वह रंगनाडी से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, जो कि उनकी जन्मभूमि भी है।

बोरा का इस्तीफा भाजपा को बढ़त का मौका देता नजर आ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बोरा के इस्तीफे के बाद कहा है कि भाजपा उनके लिए दरवाजे खुले रखती है और वह उन्हें सम्मानजनक सीट देकर अपने साथ जोड़ने का प्रस्ताव दे रहे हैं। सरमा ने यह भी संकेत दिया है कि वह व्यक्तिगत तौर पर बोरा से मिलने उनके घर आ सकते हैं ताकि अंतिम निर्णय स्पष्ट किया जा सके।

कांग्रेस आलाकमान भी इस स्थिति को गंभीरता से ले रहा है। वरिष्ठ नेताओं ने बोरा के घर जाकर उन्हें मनाने की कोशिश की है और पार्टी नेतृत्व ने बोरा से इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया है। इस बातचीत के बाद बोरा ने कहा कि उन्होंने पार्टी की बात सुनी है लेकिन अभी अंतिम निर्णय लेने के लिए समय माँगा है, जिसमें परिवार और समर्थकों से भी सलाह शामिल है। ऐसे हालात में बोरा का कल रात तक निर्णय सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भूपेन बोरा के इस्तीफे ने कांग्रेस के लिए असम में एक भारी राजनीतिक चुनौती प्रस्तुत की है, खासकर उन समय में जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। उनकी विदाई यदि औपचारिक तौर पर होती है तो यह कांग्रेस के लिए नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती की कमी को दर्शाता है। वहीं भाजपा के लिए यह अवसर असम में अपने समर्थन को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भी साबित हो सकता है।

बोरा की संभावित राजनीतिक चाल से विपक्षी दलों में भी हलचल है। कुछ नेताओं ने बोरा को कांग्रेस में वापस रखने के लिए पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व से संवाद जारी रखने का आग्रह किया है, जबकि भाजपा द्वारा बोरा को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों से राजनीतिक समीकरण और बदल सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम से असम की सियासत में आगे क्या मोड़ आता है, यह आज रात बोरा के अंतिम निर्णय के बाद स्पष्ट होगा, जो सभी राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत होगा।

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