बिहार में गंगा और कोसी समेत कई नदियों के उफान ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। राज्य के 13 जिलों के बड़े हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 29 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस बीच भागलपुर से सामने आई तस्वीरों ने चिंता और बढ़ा दी है, जहां गंगा के तेज बहाव और कटाव के बीच करीब 100 साल पुराना मंदिर नदी में समा गया।
भागलपुर में बाढ़ का असर खास तौर पर गंभीर बताया जा रहा है। गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के कारण जिले की 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार करीब 2,17,811 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। कई स्थानों पर नदी के कटाव की वजह से घरों और दूसरी संरचनाओं के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है।
इसी कटाव के बीच भागलपुर के शंकरपुर इलाके में करीब 100 साल पुराना मंदिर गंगा में समा गया। बताया जा रहा है कि मंदिर क्षेत्र में लंबे समय से नदी के कटाव का असर था और पानी का दबाव बढ़ने के साथ जमीन लगातार कटती चली गई। आखिरकार मंदिर का बड़ा हिस्सा नदी की तेज धारा में बह गया। यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की पुरानी पहचान का भी हिस्सा था।
बिहार के दूसरे इलाकों में भी बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन को राहत और बचाव अभियान तेज करना पड़ा है। सारण में भी नदी और बांध से जुड़ी स्थिति गंभीर बनी हुई है। कुछ इलाकों में बांध टूटने के बाद आसपास के गांवों में पानी फैल गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 22,035 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और आवागमन के लिए सरकारी तथा अधिग्रहित नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं, जहां बड़ी संख्या में लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
भागलपुर में राहत और बचाव के लिए SDRF की 5 टीमें, 17 मोटरबोट और 501 आपदा मित्रों को तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के मुताबिक राहत सामग्री तथा बचाव संसाधन पहुंचाए जा रहे हैं। पशुओं की सुरक्षा के लिए भी हजारों पशुओं का पंजीकरण किया गया है।
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक स्तर पर भी केंद्र से अतिरिक्त मदद की मांग उठी है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बिहार की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और राज्य के लिए 5,000 करोड़ रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता देने की मांग की है। यह उनकी राजनीतिक मांग है और इसे सरकारी निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल बिहार के कई हिस्सों में सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ता जलस्तर, नदी का कटाव और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। भागलपुर में 100 साल पुराने मंदिर का नदी में समा जाना यह दिखाता है कि बाढ़ सिर्फ घरों और खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज कटाव से वर्षों पुरानी संरचनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
