
विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) 2026 के छठे मुकाबले में क्रिकेट के इतिहास में एक अनोखा और चर्चा में आने वाला पल देखने को मिला, जब गुजरात जायंट्स की युवा बल्लेबाज़ आयुषी सोनी को ‘Retired Out’ होने वाली पहली खिलाड़ी का टैग मिला। यह घटना गुजरात जायंट्स और मुंबई इंडियंस के बीच नवी मुंबई के डी. वाई. पाटिल स्पोर्ट्स अकादमी में खेले जा रहे मैच के दौरान हुई, जिससे न केवल मैच की दिशा बल्कि क्रिकेट समुदाय में रणनीतिक सोच पर भी बहस शुरू हो गई।
इस मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया और गुजरात जायंट्स की बल्लेबाज़ी पारी का नेतृत्व किया। आयुषी सोनी, जिन्हें डेब्यू मैच में मौका मिला, धीमी गति से रन बना रही थीं — 11 रनों पर 15 गेंदें खेली गईं — और टीम को लगा कि वह टीम के लक्ष्य की गति को बरकरार रखने में सक्षम नहीं हैं। इसी दौरान टीम प्रबंधन ने एक रणनीतिक निर्णय लिया और उन्हें Retired Out घोषित कर दिया, जो आईपीएल सहित पुरुष क्रिकेट में तो देखा गया है, लेकिन ये महिला प्रीमियर लीग में पहली बार हुआ।
आयुषी सोनी खुद को इस दुर्लभ रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हुए देखें, तो यह उनके और उनके परिवार के लिए भावनात्मक रूप से भारी अनुभव रहा होगा, लेकिन टीम प्रबंधन ने इस कदम को रणनीति और मैच की स्थिति के अनुरूप एक आवश्यक निर्णय बताया। इस निर्णय के बाद भारती फुलमाली को बल्लेबाजी के लिए बुलाया गया, जिन्होंने सिर्फ 15 गेंदों में 36 रन की उग्र पारी खेलकर टीम की पारी को मजबूती दी। इससे गुजराती टीम ने अंतिम ओवरों में महत्वपूर्ण रन जोड़ने का मौका पाया।
क्रिकेट में ‘Retired Out’ का मतलब होता है कि खिलाड़ी स्वेच्छा से खेल से बाहर होता है और वह फिर पारी में वापसी नहीं कर सकता — यह ‘Retired Hurt’ से अलग है, जहां खिलाड़ी चोट की वजह से बाहर होता है लेकिन फिर लौट सकता है। इस तरह की रणनीति T20 क्रिकेट में बहुत कम ही देखने को मिलती है, खासकर महिला लीग में, इसलिए आयुषी सोनी का यह रिकॉर्ड WPL इतिहास में विशेष महत्व रखता है।
आयुषी सोनी का यह कदम सिर्फ रिकॉर्ड की किताबों में दर्ज नहीं होगा, बल्कि यह टी20 क्रिकेट के बदलते रणनीतिक चेहरों को भी दर्शाता है, जहाँ टीमें अब मैच की स्थिति के अनुसार जोखिम उठाने और बदलाव करने से परहेज़ नहीं कर रही हैं। अहम बात यह है कि टीम प्रबंधन को भी पूरा विश्वास था कि इस बदलाव से टीम का प्रदर्शन बेहतर होगा। हालांकि परिणाम चाहे जो भी रहे, इस निर्णय ने WPL के बाकी सत्रों में भी चर्चा और विश्लेषण को जन्म दिया है।
फैंस और विश्लेषक इस कदम को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं — कुछ इसे साहसिक और आधुनिक रणनीति मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे युवा खिलाड़ी के आत्म-विश्वास पर प्रभाव डालने वाला बता रहे हैं। क्रिकेट की दुनिया में ऐसे मोमेंट्स ही कभी-कभी रणनीतिक बदलावों को जन्म देते हैं और नए विचारों को जन्म देते हैं। इसके साथ ही, आयुषी सोनी को एक अलग तरह की पहचान मिल गयी है, जिसे भविष्य में पूरी लीग याद रखेगी।
यह घटना दर्शाती है कि WPL केवल खेल का आयोजन नहीं है, बल्कि यह रणनीति, नेतृत्व और खेल के भविष्य के नए आयाम भी पेश कर रही है — जहां युवा खिलाड़ियों के करियर की शुरुआत पल में ही इतिहास में बदल सकती है।



