बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी 2026 को होने वाले राष्ट्रीय आम चुनाव (Parliamentary Elections) से पहले अपना चुनावी मैनिफेस्टो (election manifesto) जारी किया है, जिसमें पार्टी ने धार्मिक स्वतंत्रता और आतंकवाद-कट्टरवाद के खिलाफ सख्त नीति को भी प्रमुखता से शामिल किया है। BNP के अध्यक्ष तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने इस घोषणापत्र में कहा है कि उनका लक्ष्य बांग्लादेश को एक न्याय-आधारित, समावेशी, शांतिपूर्ण और समृद्ध राष्ट्र बनाना है, जहाँ सभी नागरिक — चाहे वे किसी भी धर्म के हों — पूरा धार्मिक अधिकार और सुरक्षा का अनुभव करें।
घोषणापत्र के मुख्य बिंदुओं में BNP ने स्पष्ट किया है कि “धर्म व्यक्तिगत है और राज्य सभी के लिए है (Religion belongs to individuals; the state belongs to all)”, और यह सभी धार्मिक समुदायों को अपने रीति-रिवाज़, पूजा-उत्सव और धार्मिक आदर्शों का अभ्यास बिना किसी रुकावट या भय के अधिकार देगी। पार्टी ने यह भी वादा किया है कि क़ातिब, इमाम, मुज़ज़िन और धार्मिक सेवाओं से जुड़े अन्य लोगों के लिए मासिक मानदेय (honorariums) प्रदान किए जाएंगे और धार्मिक वेलफेयर ट्रस्टों का विस्तार किया जाएगा ताकि धार्मिक नेताओं और संस्थाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद के खिलाफ BNP ने अपने मैनिफेस्टो में जीरो-टॉलरेंस (zero tolerance) नीति अपनाने का वादा किया है। पार्टी का कहना है कि अगर वे सत्ता में आते हैं तो वे सभी प्रकार के आतंकवादी, मिलिटेंट और उग्रवादी गतिविधियों (terrorism, militancy, extremism) को समाप्त करने के लिए कानूनी, सामाजिक और रोक-थाम (preventive) उपाय करेंगे, जिसमें राष्ट्रीय सहमति पर आधारित रणनीतियाँ लागू की जाएँगी। इस नीति का उद्देश्य देश में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामूहिक शांति (peace and order) को सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा BNP के घोषणापत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी कोई समझौता नहीं करने, वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता लाने, युवा रोजगार सृजन, किसानों की सुरक्षा जैसे कई सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी योजनाएँ शामिल हैं। पार्टी का प्रमुख नारा “Bangladesh First” (बांग्लादेश पहले) है, जो देश की एकता, सुधार और समानता को प्राथमिकता देता है।
इस मैनिफेस्टो को ऐसे समय में जारी किया गया है जब बांग्लादेश में जातिगत और धार्मिक दलों की राजनीति सक्रिय है, और Jamaat-e-Islami जैसे इस्लामवादी समूहों की भूमिका पर भी देश में बहस हो रही है। BNP का यह घोषणापत्र धार्मिक स्वतंत्रता, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और सामाजिक सद्भाव को चुनावी एजेंडा का एक प्रमुख हिस्सा बनाता है, जो आगामी चुनावों में मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है।
