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Brazil Election 2026: फ्लेवियो बोल्सोनारो और लूला आमने-सामने, 25 अक्टूबर को होगा राष्ट्रपति पद का फाइनल मुकाबला

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ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में अब मुकाबला सीधे तौर पर फ्लेवियो बोल्सोनारो और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच होगा। रविवार को हुए पहले चरण के मतदान में किसी भी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट नहीं मिल सके। इसके बाद दोनों सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवारों के बीच 25 अक्टूबर को दूसरे चरण का मतदान कराया जाएगा।

पहले चरण में सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो सबसे आगे रहे। चुनावी आंकड़ों के अनुसार करीब 99.97 प्रतिशत मतों की गिनती के बाद फ्लेवियो को 47.04 प्रतिशत वोट मिले, जबकि लूला को 45.15 प्रतिशत वोट हासिल हुए। इस तरह दोनों के बीच करीब दो प्रतिशत का अंतर रहा। अब ब्राजील के मतदाताओं के सामने राष्ट्रपति पद के लिए इन दोनों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा।

45 वर्षीय फ्लेवियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पिता ने ही उन्हें कंजर्वेटिव खेमे का उम्मीदवार बनाने का फैसला किया था। फ्लेवियो फिलहाल ब्राजील के सीनेटर हैं और उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में अपराध पर सख्त रुख, आर्थिक सुधार और रूढ़िवादी सामाजिक नीतियों को प्रमुख मुद्दा बनाया है।

दूसरी तरफ 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा चौथी बार गैर-लगातार राष्ट्रपति कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। वह इससे पहले 2003 से 2010 तक दो बार राष्ट्रपति रह चुके हैं और 2023 में दोबारा सत्ता में लौटे थे। इस चुनाव में उनका जोर सामाजिक कल्याण योजनाओं, अर्थव्यवस्था, रोजगार और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा जैसे मुद्दों पर रहा है।

पहले चरण के नतीजे इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि चुनाव से पहले सामने आए कई सर्वेक्षणों में लूला को मामूली बढ़त दिखाई गई थी। लेकिन मतदान के बाद फ्लेवियो ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। अब दूसरे चरण में उन मतदाताओं का रुख बेहद महत्वपूर्ण होगा, जिन्होंने पहले चरण में तीसरे और अन्य उम्मीदवारों को वोट दिया था।

ब्राजील के चुनावी नियमों के मुताबिक अगर कोई उम्मीदवार पहले चरण में वैध मतों का आधे से ज्यादा हिस्सा हासिल नहीं करता, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच रनऑफ कराया जाता है। इस बार यही स्थिति बनी है। इसलिए 25 अक्टूबर को होने वाला मतदान ही तय करेगा कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल ब्राजील की कमान अगले कार्यकाल में लूला के हाथ में रहेगी या फ्लेवियो बोल्सोनारो सत्ता परिवर्तन करने में सफल होंगे।

फ्लेवियो के लिए पहले चरण का प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने कई अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बनाई है। उनके पक्ष में दक्षिणपंथी मतदाताओं का ध्रुवीकरण दिखाई दिया है। अब उनकी कोशिश उन मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की होगी, जिन्होंने पहले चरण में अन्य उम्मीदवारों का समर्थन किया था। हालांकि उनके सामने यह चुनौती भी रहेगी कि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत से जुड़े विवादों से अलग अपनी छवि को मजबूत कर सकें।

लूला के सामने भी बड़ी चुनौती है। उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए पहले चरण से आगे निकलना होगा और उन मतदाताओं का भरोसा हासिल करना होगा जो बदलाव चाहते हैं। महंगाई, रोजमर्रा की लागत, घरेलू कर्ज और आर्थिक हालात जैसे मुद्दे उनके लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं उनकी पार्टी दूसरे चरण में सामाजिक कल्याण योजनाओं और सरकार के कामकाज को प्रमुखता से सामने रखने की कोशिश करेगी।

इस चुनाव का असर सिर्फ ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील की विदेश नीति, अमेरिका और चीन के साथ संबंध तथा क्षेत्रीय राजनीति पर भी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का प्रभाव पड़ सकता है। फ्लेवियो को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीब माना जाता है, जबकि लूला की सरकार बहुपक्षीय सहयोग और ब्रिक्स जैसे मंचों को महत्व देती रही है।

अब दोनों उम्मीदवारों के पास 25 अक्टूबर तक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का समय है। पहले चरण में फ्लेवियो बोल्सोनारो ने बढ़त जरूर बनाई है, लेकिन राष्ट्रपति बनने के लिए उन्हें दूसरे चरण में 50 प्रतिशत से ज्यादा वैध मत हासिल करने होंगे। वहीं लूला के पास भी पिछड़ने के बावजूद मुकाबले में वापसी का मौका है। ऐसे में 25 अक्टूबर का रनऑफ ब्राजील की राजनीति के लिए बेहद अहम मुकाबला होने जा रहा है।

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