नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का रविवार को अंतिम दिन है। भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेता एक साथ जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से खास बना दिया है। दूसरे दिन की शुरुआत नेताओं की फैमिली फोटो के साथ हुई, जिसमें मोदी, पुतिन और शी एक साथ नजर आए।
BRICS सम्मेलन के पहले दिन सबसे ज्यादा चर्चा मोदी और शी जिनपिंग की करीब 50 मिनट चली द्विपक्षीय बैठक की रही। सात साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने पर जोर दिया गया। व्यापार असंतुलन, बाजार तक पहुंच और कारोबारी संबंधों को बेहतर बनाने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी BRICS में भारत के प्रमुख साझेदार के तौर पर मौजूद हैं। मोदी-पुतिन की मुलाकात और दोनों नेताओं की BRICS मंच पर सक्रिय मौजूदगी ने भारत-रूस संबंधों को भी सम्मेलन के प्रमुख पहलुओं में शामिल कर दिया है। वहीं मोदी, पुतिन और शी की एक साथ तस्वीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर BRICS की बढ़ती राजनीतिक अहमियत के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS के पहले दिन सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दी। इसमें अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने, संघर्षों को रोकने और वैश्विक तनाव कम करने पर जोर दिया गया। मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चिंता जताई गई और अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। समूह ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक उपायों को लेकर भी चिंता जाहिर की।
भारत की अध्यक्षता में इस बार BRICS के एजेंडे में ग्लोबल साउथ, बहुपक्षीय व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, तकनीक और वैश्विक शासन में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए ग्लोबल गवर्नेंस सुधार के लिए BRICS देशों के बीच रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा।
दूसरे दिन नेताओं के बीच कई अहम बैठकों और चर्चा का कार्यक्रम है। भारत के लिए यह सम्मेलन केवल बहुपक्षीय मंच नहीं, बल्कि चीन, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। सम्मेलन के दौरान भारत की कोशिश BRICS को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के बजाय सहयोग, विकास और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश करने की है।
BRICS समिट के अंतिम दिन की तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक साथ चीन और रूस जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ संवाद को आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में सीमा विवाद, व्यापार, वैश्विक संघर्षों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर इस सम्मेलन के प्रभाव को देखा जाएगा।
नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का रविवार को अंतिम दिन है। भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेता एक साथ जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने इस सम्मेलन को वैश्विक कूटनीति के लिहाज से खास बना दिया है। दूसरे दिन की शुरुआत नेताओं की फैमिली फोटो के साथ हुई, जिसमें मोदी, पुतिन और शी एक साथ नजर आए।
BRICS सम्मेलन के पहले दिन सबसे ज्यादा चर्चा मोदी और शी जिनपिंग की करीब 50 मिनट चली द्विपक्षीय बैठक की रही। सात साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने, सीमा पर शांति बनाए रखने और मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकने पर जोर दिया गया। व्यापार असंतुलन, बाजार तक पहुंच और कारोबारी संबंधों को बेहतर बनाने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी BRICS में भारत के प्रमुख साझेदार के तौर पर मौजूद हैं। मोदी-पुतिन की मुलाकात और दोनों नेताओं की BRICS मंच पर सक्रिय मौजूदगी ने भारत-रूस संबंधों को भी सम्मेलन के प्रमुख पहलुओं में शामिल कर दिया है। वहीं मोदी, पुतिन और शी की एक साथ तस्वीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर BRICS की बढ़ती राजनीतिक अहमियत के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS के पहले दिन सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दी। इसमें अंतरराष्ट्रीय विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाने, संघर्षों को रोकने और वैश्विक तनाव कम करने पर जोर दिया गया। मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चिंता जताई गई और अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। समूह ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक उपायों को लेकर भी चिंता जाहिर की।
भारत की अध्यक्षता में इस बार BRICS के एजेंडे में ग्लोबल साउथ, बहुपक्षीय व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, तकनीक और वैश्विक शासन में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए ग्लोबल गवर्नेंस सुधार के लिए BRICS देशों के बीच रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा।
दूसरे दिन नेताओं के बीच कई अहम बैठकों और चर्चा का कार्यक्रम है। भारत के लिए यह सम्मेलन केवल बहुपक्षीय मंच नहीं, बल्कि चीन, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। सम्मेलन के दौरान भारत की कोशिश BRICS को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के बजाय सहयोग, विकास और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में पेश करने की है।
BRICS समिट के अंतिम दिन की तस्वीर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक साथ चीन और रूस जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ संवाद को आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में सीमा विवाद, व्यापार, वैश्विक संघर्षों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर इस सम्मेलन के प्रभाव को देखा जाएगा।
