
भारत के राजनीतिक परिदृश्य में इंडिया टुडे और सी-वोटर द्वारा किए गए ‘मूड ऑफ द नेशन’ (Mood of the Nation) सर्वे 2026 के ताज़ा नतीजे जारी कर दिए गए हैं, जिनमें इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व और गठबंधन की ताकत को लेकर आम जनमानस की राय सामने आई है। इस सर्वे के अनुसार जब INDIA ब्लॉक के नेतृत्व के लिए नेताओं में वरीयता पूछी गई, तो 29% लोगों ने राहुल गांधी को सबसे उपयुक्त विकल्प बताया, जबकि अन्य बड़े नेताओं जैसे ममता बनर्जी को 7%, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव को लगभग 6-6% समर्थन मिला है।
हालांकि दिलचस्प यह है कि सर्वे में 62% लोगों ने कांग्रेस पार्टी को INDIA ब्लॉक की सबसे कमजोर कड़ी बताया, जो गठबंधन के भीतर पार्टी की भूमिका और उसकी स्वीकार्यता पर प्रश्नचिन्ह उठाता है। इस आंकड़े से यह संकेत मिल सकता है कि जनता के बीच कांग्रेस की साख पर चुनौतियां हैं, बावजूद इसके राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से गठबंधन का नेतृत्व करने योग्य माने जा रहे हैं।
सर्वे दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक 36,265 से अधिक लोगों से उनकी राय लेकर किया गया, जिसमें अलग-अलग आयु, समुदाय, लिंग और शिक्षा वर्गों के लोगों की हिस्सेदारी थी। इस सर्वे में राजनीतिक दलों और नेताओं की लोकप्रियता के साथ-साथ यह भी अनुमान लगाया गया कि अगर आज लोकसभा चुनाव कर दिए जाएं, तो NDA को 352 सीटों के साथ भारी बहुमत मिल सकता है और बीजेपी अकेले 287 सीटें जीतने की स्थिति में दिखाई देती है, जबकि इंडिया ब्लॉक को लगभग 182 सीटें मिल सकती हैं।
वोट शेयर के मामले में भी NDA गठबंधन को लगभग 47% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि INDIA ब्लॉक को 39% वोट मिलने की संभावना जताई जा रही है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि वर्तमान में जनता के बीच राष्ट्रीय स्तर पर NDA की धार मजबूत बनी हुई है, हालांकि विपक्षी गठबंधन भी अच्छी खासी हिस्सेदारी हासिल करता दिखता है।
विश्लेषकों का कहना है कि सर्वे के आंकड़े केवल जनता की वर्तमान राजनीतिक धारणा को परिलक्षित करते हैं और असली चुनाव परिणाम कई कारकों पर निर्भर करेंगे, जैसे कि अगली बड़ी चुनावी रणनीतियाँ, गठबंधन की मजबूती और आर्थिक-सामाजिक मुद्दों पर जनता की संवेदनाएँ। कुल मिलाकर यह सर्वे 2026 के राजनीतिक माहौल का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है, जो दिखाता है कि सत्ता-प्रतिस्पर्धा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व NDA के पक्ष में मजबूत बना हुआ है, तो वहीं राहुल गांधी विपक्षी नेतृत्व के रूप में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं।



