दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर बार-बार सड़कों को जाम करने और आम लोगों को परेशानी में डालने को सही नहीं ठहराया जा सकता। चिराग ने कहा कि अगर विपक्ष को चुनाव आयोग से कोई शिकायत है, तो उसे अपनी बात उचित और वैधानिक माध्यमों से रखनी चाहिए।
चिराग पासवान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की आजादी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी प्रदर्शन की आड़ में अगर असामाजिक तत्व अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं, तो उनकी पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, सामान्य और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए, लेकिन कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों को रोकना जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर पूछे गए सवाल पर चिराग ने कहा कि वह किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते। उन्होंने साथ ही कहा कि अलग-अलग परिस्थितियों में पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं। उनके बयान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत, दोनों पर जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, से अपील की कि अगर उन्हें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली या मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर चिंता है, तो उन्हें आयोग से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार विरोध प्रदर्शन करने के बजाय संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर सवालों के जवाब मांगे जा सकते हैं। चिराग के मुताबिक, बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए, क्योंकि लगातार सड़कें बंद होने से आम नागरिकों को परेशानी होती है।
चिराग पासवान ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को रोका नहीं जा सकता और वे दुनिया को रास्ता दिखाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक संदेश देने पर अधिक ध्यान दे रहा है। ये टिप्पणियां चिराग की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं, जबकि विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं लगातार उठा रहे हैं।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था। यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे विवाद के बीच हो रहा है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया से संबंधित सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कई इलाकों में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई तथा मेट्रो और सड़क यातायात पर पाबंदियों के कारण लोगों को परेशानी हुई। इस बीच, 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित करने तथा इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने के निर्देश दिए। अदालत ने अधिकारियों से सार्वजनिक आवाजाही और प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों पर जवाब भी मांगा।
चिराग पासवान के बयान से साफ है कि वह शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए भी लंबे समय तक सड़कें जाम रहने और आम जनता को होने वाली परेशानी पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, CJP और विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगों के साथ विरोध जारी रखने की बात कर रहे हैं। अब इस पूरे मामले में राजनीतिक बातचीत, पुलिस की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन पर नजर रहेगी।
