मध्य प्रदेश के दमोह जिला अस्पताल से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी अस्पतालों की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक महिला अस्पताल के वार्ड में फर्श साफ करती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि महिला अपने बीमार बेटे का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी और आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने उससे गंदगी साफ करने को कहा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, महिला की पहचान हल्की बहू के रूप में हुई है, जो दमोह जिले के तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली हैं। वह अपने बेटे को दस्त की शिकायत होने पर इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची थीं। वायरल वीडियो में महिला फर्श पर पोंछा लगाती दिखाई देती हैं। महिला का आरोप है कि वार्ड में गंदगी फैलने के बाद ड्यूटी पर मौजूद नर्स ने उनसे सफाई करने के लिए कहा था। हालांकि, घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए राज्य सरकार और अस्पताल की व्यवस्था पर निशाना साधा। पटवारी ने पूछा कि जब अस्पताल में सफाई के लिए कर्मचारी तैनात हैं, तो मरीज के परिजन को पोंछा लगाने की नौबत क्यों आई। उन्होंने सफाई व्यवस्था के लिए आवंटित धन और कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। ये आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।
इस घटना में अस्पताल की सफाई व्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कुल 55 कर्मचारी तैनात बताए गए हैं। इनमें 52 सफाईकर्मी और तीन सुपरवाइजर शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सफाई व्यवस्था के लिए एजेंसी को हर महीने करीब आठ से नौ लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी व्यवस्था के बावजूद मरीज के परिजन को खुद सफाई क्यों करनी पड़ी।
वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है। जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, जांच में वीडियो करीब डेढ़ से दो महीने पुराना पाया गया। उन्होंने कहा कि स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार, सफाईकर्मी पहले सफाई कर चुका था और इसके बाद महिला ने अपनी ओर से अतिरिक्त सफाई करने की बात कही थी। अस्पताल प्रशासन का यह पक्ष महिला के आरोप से अलग है, इसलिए घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
मामले में कार्रवाई करते हुए सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने संबंधित नर्सिंग ऑफिसर, सफाई एजेंसी और सहायक अस्पताल प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, जांच में जिसकी भी जिम्मेदारी सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, नोटिस जारी होने के बाद जांच और संबंधित कर्मचारियों के जवाब का इंतजार है।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार तथा वार्डों की नियमित सफाई को लेकर बहस छेड़ दी है। अस्पताल में उपचार के साथ साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है। मरीज के परिजन पहले से ही बीमारी और देखभाल की चिंता में रहते हैं, ऐसे में सफाई की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही अहम हो जाती है।
फिलहाल, दमोह जिला अस्पताल के वायरल वीडियो में महिला के पोंछा लगाने की घटना और उसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। महिला ने नर्सिंग स्टाफ पर सफाई करने के लिए कहने का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वीडियो पुराना है और सफाईकर्मी पहले ही अपना काम कर चुका था। अब जांच के निष्कर्ष से ही स्पष्ट होगा कि उस समय क्या हुआ था और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
