दिल्ली सरकार ने राजधानी के छोटे, सूक्ष्म और लघु कारोबारियों के लिए एक ऐतिहासिक आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की है, जिसके तहत अब व्यापारी बिना किसी गारंटी (collateral-free) के 10 करोड़ रुपये तक का बैंक लोन ले सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य व्यवसायियों को पूंजी की समस्या से निजात दिलाना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र को मजबूती से खड़ा करना है। इस योजना के लिए सरकार और Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises (CGTMSE) के बीच एक अहम समझौता (MoU) किया गया है, जिससे बैंकों के लिए जोखिम कम होगा और वे सहज रूप से लोन प्रदान कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में दिल्ली सचिवालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत बैंक ऋण का अधिकतर हिस्सा CGTMSE की गारंटी के तहत कवर होगा और शेष भाग पर दिल्ली सरकार का समर्थन मिलेगा। इस व्यवस्था से बैंक का जोखिम गिरकर बहुत कम—लगभग मात्र 5 प्रतिशत—हो जाएगा, जिससे वे छोटे कारोबारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता दे सकेंगे।
सरकार ने इस योजना के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष फंड भी तैयार किया है, जिससे लगभग 2500 करोड़ रुपये तक के लोन वितरित किए जा सकते हैं। योजना में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, रिटेल, शिक्षा, प्रशिक्षण संस्थान तथा अन्य विविध सेक्टरों को शामिल किया गया है, ताकि बड़े स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ें। शुरुआत में लगभग एक लाख लाभार्थियों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन इसकी पात्रता सूची सीमित नहीं होगी।
दिल्ली सरकार और CGTMSE की साझेदारी वाली यह कोलेटरल-फ्री लोन स्कीम छोटे उद्यमियों, महिला व्यवसायियों और नए स्टार्टअप्स के लिए गेम-चेंजर कदम के रूप में देखी जा रही है। उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे MSME और लघु उद्योगों को बैंकों से ऋण पाना सरल और तेज़ होगा, जो इससे पहले गारंटी की कमी के कारण कठिन था।
विशेष रूप से यह पहल उन छोटे व्यवसायों के लिए एक बड़ा मौक़ा साबित होगी, जिन्हें आज तक बैंकिंग संरचना से जुड़ने में दिक्कतें आती थी क्योंकि उनके पास गिरवी रखने-योग्य संपत्ति नहीं होती थी। इससे न केवल मौजूदा व्यापार का विस्तार संभव होगा, बल्कि नए उद्यम शुरू करना और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे स्थानीय आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
आलोचक भी इस योजना की प्रक्रिया और कार्यान्वयन पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पात्र व्यवसायियों को समयबद्धता से लोन मिले और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण सहायता को देर न हो। यदि योजना को सुचारू रूप से लागू किया गया, तो यह दिल्ली की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है और व्यवसायिक गतिविधियों को एक बड़ा ऊर्जा-धक्का मिल सकता है।
