दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण से निपटने के लिए संशोधित ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP का नया शेड्यूल 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गया है। नए नियमों में वाहनों, धूल, निर्माण गतिविधियों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई प्रावधानों को पहले की तुलना में सख्त किया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि GRAP की सभी पाबंदियां एक साथ लागू हो गई हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ संबंधित चरण की कार्रवाई लागू होगी।
संशोधित GRAP में चार चरण बनाए गए हैं। दिल्ली का AQI 201 से 300 के बीच रहने पर स्टेज-1, 301 से 400 पर स्टेज-2, 401 से 450 पर स्टेज-3 और 450 से ऊपर पहुंचने पर स्टेज-4 की कार्रवाई लागू होगी। एक चरण लागू होने के बाद पहले चरणों के उपाय भी जारी रहेंगे, जिससे हवा की स्थिति बिगड़ने पर पाबंदियां धीरे-धीरे और कड़ी होती जाएंगी।
नए GRAP शेड्यूल में कुल 48 कार्रवाई बिंदु हैं। इनमें 25 स्टेज-1, 8 स्टेज-2, 10 स्टेज-3 और 5 स्टेज-4 से जुड़े हैं। संशोधन के तहत धूल नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और परिवहन से संबंधित कई उपायों को दोहराव से बचाने के लिए व्यवस्थित किया गया है। इसके अलावा डीजल जेनरेटर सेट और NCR तथा आसपास के राज्यों से आने वाली BS-IV और उससे कम मानक वाली बसों से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को पहले के मुकाबले शुरुआती चरण में ही शामिल किया गया है।
वाहनों को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। BS-III पेट्रोल और BS-IV या उससे कम मानक वाले डीजल हल्के मोटर वाहनों पर प्रतिबंध लागू होने वाले क्षेत्रों में अब सोनीपत को भी शामिल किया गया है। पहले इस व्यवस्था में गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर शामिल थे। इसके अलावा पुराने मानक वाले मालवाहक वाहनों के लिए भी GRAP के गंभीर चरणों में नियम सख्त किए गए हैं।
संशोधित व्यवस्था में BS-IV और उससे नीचे के कुछ मालवाहक वाहनों को जरूरी सामान या आवश्यक सेवाएं पहुंचाने के नाम पर मिलने वाली छूट भी हटा दी गई है। स्टेज-3 में हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों तथा स्टेज-4 में ट्रक और भारी मालवाहक वाहनों पर लागू प्रतिबंधों में यह बदलाव किया गया है। साथ ही दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-IV और उससे कम मानक वाले डीजल हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश को लेकर भी प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं।
दिल्ली-NCR में 1 अक्टूबर से ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ व्यवस्था भी लागू की जा रही है। यानी जिन वाहनों के पास वैध Pollution Under Control Certificate नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या CNG भरवाने में परेशानी हो सकती है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ईंधन स्टेशनों पर Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिल्ली में करीब 500 ईंधन स्टेशनों पर इस व्यवस्था को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी की गई है।
प्रदूषण बढ़ने पर निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने का विकल्प भी GRAP में रखा गया है। हालांकि, केवल संशोधित GRAP लागू होने से पार्किंग शुल्क अपने आप नहीं बढ़ गया है। संबंधित चरण लागू होने और प्रशासनिक आदेश के बाद ही ऐसे उपायों को लागू किया जाएगा। इसलिए वाहन चालकों को अपने इलाके में जारी स्थानीय आदेशों पर भी नजर रखनी होगी।
स्कूलों और दफ्तरों के लिए भी प्रदूषण के गंभीर स्तर पर व्यवस्था बदलेगी। GRAP के स्टेज-3 में दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई का विकल्प लागू किया जा सकता है। स्टेज-4 में यह व्यवस्था कक्षा 6 से 9 और 11 तक बढ़ सकती है। जरूरत पड़ने पर सरकारी, नगर निकाय और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति और बाकी कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था पर भी फैसला लिया जा सकता है।
निर्माण और सड़क से जुड़े कामों पर भी प्रदूषण की स्थिति के अनुसार सख्ती बढ़ेगी। हालांकि संशोधित नियमों में स्टेज-3 के दौरान गड्ढों की मरम्मत जैसे जरूरी कार्यों को प्रदूषण नियंत्रण उपायों के साथ जारी रखने की अनुमति दी गई है। वहीं स्टेज-4 में दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर ज्यादा सख्ती होगी, हालांकि निर्धारित स्वच्छ ईंधन और BS-VI मानक वाले वाहनों के लिए नियमों के अनुसार छूट रहेगी।
फिलहाल 1 अक्टूबर से संशोधित GRAP का ढांचा प्रभावी हुआ है, लेकिन इसे समझना जरूरी है कि हर चरण की पाबंदी उसी समय लागू नहीं होती। दिल्ली की हवा खराब होने पर AQI के स्तर और मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर संबंधित चरण को लागू किया जाएगा। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए वैध PUC प्रमाणपत्र रखना, अपने वाहन का BS उत्सर्जन मानक जानना और NCR में यात्रा से पहले लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।
