राजस्थान के कोटा की भारतीय वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी को एशियन गेम्स की घोषित टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर करीब 9 मिनट का एक भावुक वीडियो जारी किया है। वीडियो में दिव्यांशी रोते हुए अपने चयन को लेकर सवाल उठाती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले उनका चयन भारतीय टीम में हो चुका था, उन्हें टीम की किट और भारतीय जर्सी भी मिल चुकी थी, लेकिन आखिरी समय में उनका नाम हटाकर दूसरी खिलाड़ी को टीम में शामिल कर लिया गया।
जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारतीय वुशु टीम की घोषणा 23 जून को की गई थी। इसके बाद 11 सितंबर को खेल मंत्रालय की ओर से जारी अपडेट में टीम में बदलाव किया गया और दिव्यांशी चौधरी की जगह नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल किया गया। इसी बदलाव के बाद दिव्यांशी ने अपना वीडियो जारी कर चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
दिव्यांशी ने लगाए चयन प्रक्रिया पर सवाल
दिव्यांशी का दावा है कि जून में जम्मू-कश्मीर में हुए फाइनल सिलेक्शन ट्रायल में उन्होंने 60 किलोग्राम वर्ग में रोशिबीना देवी को हराया था। उनका कहना है कि जब उन्होंने ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन किया था, तो इसके बावजूद आखिरी समय में टीम से उनका नाम क्यों हटाया गया।
दिव्यांशी के मुताबिक, एशियन गेम्स की तैयारी के लिए वह भारतीय वुशु टीम के कैंप में भी ट्रेनिंग कर रही थीं। उन्हें टीम की किट दी गई थी और चयन के बाद संबंधित औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी थीं। उनके पिता सुनील कुमार सुंडा ने भी दावा किया कि बेटी का चयन हो चुका था और जापान जाने की तैयारी चल रही थी।
चोट को लेकर फेडरेशन और खिलाड़ी के दावे अलग
दिव्यांशी को टीम से बाहर किए जाने की वजह को लेकर वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया और खिलाड़ी का पक्ष अलग-अलग है। एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह के मुताबिक दिव्यांशी चोटिल हैं और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें एशियन गेम्स में भेजने का फैसला नहीं लिया गया।
वहीं दिव्यांशी का कहना है कि श्रीनगर कैंप के दौरान उनके कंधे में चोट जरूर लगी थी, लेकिन कुछ दिनों के आराम के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू कर दिया था। उनका दावा है कि इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और डॉक्टर ने उन्हें टेपिंग के साथ खेलने की अनुमति दी थी। दिव्यांशी के अनुसार उनकी MRI और डॉक्टर की रिपोर्ट कोच तथा फेडरेशन के पास भी थी।
फेडरेशन की ओर से यह भी कहा गया है कि खिलाड़ी जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर खुद को फिट बता रही हैं, वह निजी डॉक्टर की रिपोर्ट है, जबकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें पूरी तरह फिट नहीं बताया गया। एसोसिएशन का कहना है कि एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीतना प्राथमिकता है और इसलिए मेडिकल तौर पर पूरी तरह फिट नहीं होने वाले खिलाड़ी को भेजना उचित नहीं था।
रोशिबीना पर चोट पहुंचाने का आरोप, फेडरेशन ने किया खारिज
दिव्यांशी और उनके पिता ने श्रीनगर कैंप के दौरान रोशिबीना देवी पर जानबूझकर कंधे में चोट पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, वुशु एसोसिएशन ने इस आरोप से इनकार किया है। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि वुशु मार्शल आर्ट का खेल है और मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों को चोट लगना संभव है। किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर चोट पहुंचाई, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
वीडियो में भावुक हुईं दिव्यांशी
टीम से बाहर किए जाने के बाद जारी वीडियो में दिव्यांशी बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगी और अपनी मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर बात कही। वीडियो के अंत में उन्होंने कैमरा घर की छत की ओर कर दिया और इसे अपना आखिरी वीडियो बताया।
उनकी इस बात के बाद मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। हालांकि, वीडियो में कही गई बातों की आगे की स्थिति या किसी अप्रिय घटना की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं है। ऐसे में प्राथमिकता दिव्यांशी की सुरक्षा और मामले की निष्पक्ष जांच होना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत चुकी हैं मेडल
दिव्यांशी चौधरी 60 किलोग्राम वर्ग में सांदा स्पर्धा में हिस्सा लेती हैं। वह पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीत चुकी हैं। 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। जून 2026 में चीन में हुई अंतरराष्ट्रीय वुशु प्रतियोगिता में भी उनके नाम सिल्वर मेडल रहा।
दिव्यांशी वर्ष 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं। उनके पिता के मुताबिक, उन्होंने राजस्थान के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं में 12 गोल्ड मेडल भी जीते हैं।
अब चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के जवाब का इंतजार
एशियन गेम्स में वुशु के मुकाबले 20 से 24 सितंबर के बीच होने हैं। भारतीय टीम में तीन पुरुष और चार महिला खिलाड़ी शामिल हैं। दिव्यांशी को हटाकर रोशिबीना देवी को शामिल किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल चयन और मेडिकल मूल्यांकन की प्रक्रिया को लेकर है।
दिव्यांशी के आरोपों और फेडरेशन के मेडिकल आधार वाले दावे के बीच वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इस विवाद ने भारतीय वुशु टीम के चयन को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
