कर्नाटक की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी दर्ज कराई।
शिवकुमार के साथ 13 अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिससे नई सरकार के पहले चरण के मंत्रिमंडल का गठन हो गया। कांग्रेस ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। जानकारी के अनुसार, जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है, जबकि कई क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रियों का चयन किया गया है।
यह शपथ ग्रहण समारोह इसलिए भी खास रहा क्योंकि कांग्रेस ने इसे नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद पार्टी में एकता का संदेश देने के अवसर के रूप में पेश किया। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार एक साथ मंच पर नजर आए, जिससे सत्ता हस्तांतरण को सहज और सौहार्दपूर्ण दिखाने की कोशिश की गई। हाल ही में सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) का सदस्य बनाए जाने को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कई दिनों की अटकलों और पार्टी के भीतर चली लंबी चर्चा के बाद डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। कांग्रेस विधायक दल ने उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था, जिसके बाद राज्यपाल ने सरकार बनाने का निमंत्रण दिया। यह बदलाव कर्नाटक में पिछले कई वर्षों में हुए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों में से एक माना जा रहा है।
नई सरकार के सामने अब विकास योजनाओं को गति देने, चुनावी वादों को पूरा करने और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की चुनौती होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार का कार्यकाल कांग्रेस के लिए आगामी चुनावी रणनीति और राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
