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ट्रंप को फिर बड़ा झटका! जन्म से अमेरिकी नागरिकता पर नई पाबंदी भी कोर्ट ने रोकी, 6 सितंबर से लागू होना था आदेश

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अमेरिका में जन्म से नागरिकता यानी Birthright Citizenship को सीमित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई कोशिश को एक बार फिर अदालत से झटका लगा है। मैरीलैंड की फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने ट्रंप प्रशासन के नए कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक लगा दी है। अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले बच्चों को कुछ परिस्थितियों में स्वतः नागरिकता मिलने से रोकने की कोशिश कर रहा था।

दरअसल, ट्रंप ने 6 अगस्त 2026 को एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। यह उनका जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने का दूसरा बड़ा प्रयास था। नए आदेश में उन बच्चों की नागरिकता पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, जिनके माता-पिता कुछ विशेष श्रेणियों में आते हैं। इनमें तथाकथित ‘Birth Tourism’ यानी बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आकर प्रसव कराने के मामलों को भी निशाना बनाया गया था। यह आदेश 6 सितंबर से प्रभावी होना था, लेकिन उससे पहले ही अदालत ने इसके अमल पर रोक लगा दी।

नए आदेश के तहत ट्रंप प्रशासन ने कुछ ऐसी परिस्थितियां तय करने की कोशिश की थी, जिनमें अमेरिका में पैदा हुए बच्चे को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। इनमें ऐसे मामले शामिल थे जहां माता-पिता में से कोई व्यक्ति अमेरिका में अस्थायी या गैर-नागरिक स्थिति में हो और कथित तौर पर बच्चे के जरिए नागरिकता हासिल करने की व्यावसायिक व्यवस्था में शामिल हो। इसके अलावा ‘Alien Enemy’ या विदेशी सरकार के कर्मचारियों से जुड़े कुछ मामलों को भी आदेश के दायरे में रखा गया था।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि संविधान में जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार असीमित नहीं है और कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद लागू किए जा सकते हैं। प्रशासन विशेष रूप से ‘Birth Tourism’ को रोकने की दलील दे रहा है। लेकिन प्रवासी परिवारों और अधिकार संगठनों ने इस आदेश को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश के जरिए संविधान में दिए गए नागरिकता के अधिकार को सीमित नहीं कर सकते।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का जून 2026 का फैसला है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की पिछली व्यापक कोशिश को असंवैधानिक माना था। अदालत ने 6-3 के फैसले में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर ट्रंप प्रशासन के पहले आदेश को खारिज किया था। इस फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने का मूल सिद्धांत 14वें संविधान संशोधन से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली और अगस्त में नया आदेश जारी किया। इस बार पूरे Birthright Citizenship सिस्टम को खत्म करने के बजाय कुछ विशेष श्रेणियों के बच्चों को इससे बाहर करने की कोशिश की गई। लेकिन मैरीलैंड की जज बोर्डमैन ने प्रारंभिक तौर पर इस नए आदेश को भी संवैधानिक रूप से टिकने योग्य नहीं माना और उसके अमल पर रोक लगा दी।

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पिछली व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि जिन बच्चों को मामले में शामिल वर्ग के तहत नागरिक माना जाता है, उन्हें जन्म के समय अमेरिकी नागरिकता प्राप्त है। अदालत के अनुसार, राष्ट्रपति का कार्यकारी आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित संवैधानिक व्यवस्था को अपने दम पर बदल नहीं सकता।

इस कानूनी लड़ाई में प्रवासी परिवारों और उनके अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने अदालत का रुख किया था। उनका कहना था कि नए आदेश से ऐसे परिवारों के बच्चों की नागरिकता अनिश्चित हो सकती है, जिन्हें अमेरिकी कानून के तहत जन्म के समय नागरिक माना जाता है। अदालत ने मामले में प्रारंभिक राहत देते हुए सरकारी एजेंसियों को फिलहाल प्रभावित बच्चों की नागरिकता से इनकार करने या उसे चुनौती देने की कार्रवाई से रोक दिया है।

इस फैसले का असर उन भारतीय और अन्य विदेशी परिवारों पर भी पड़ सकता है जो अमेरिका में रहते हैं या वहां बच्चे के जन्म से जुड़े नियमों को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, मौजूदा आदेश का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका में नागरिकता से जुड़े नियमों पर बहस खत्म हो गई है। मामला अभी अदालत में लंबित है और आगे की कानूनी लड़ाई में उच्च अदालतों तक यह विवाद पहुंच सकता है।

ट्रंप के लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण झटका है। उनका प्रशासन लंबे समय से अमेरिका की इमिग्रेशन नीति को सख्त करने की कोशिश कर रहा है। अवैध प्रवास, सीमा सुरक्षा और Birth Tourism को लेकर ट्रंप प्रशासन कई बड़े कदम उठा चुका है। लेकिन जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा सीधे अमेरिकी संविधान और सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील है।

अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन को इस बहस का केंद्र माना जाता है। इसी संशोधन की Citizenship Clause को लंबे समय से अमेरिका में जन्म लेने वाले लोगों की नागरिकता के संवैधानिक आधार के रूप में देखा जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले ने भी इसी संवैधानिक व्यवस्था की व्याख्या की थी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि संविधान में पहले से मान्य कुछ सीमित अपवादों के अलावा नए अपवाद बनाना बेहद कठिन है।

अब ट्रंप प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि वह नए आदेश को कानूनी रूप से कैसे बचाता है। अदालत ने फिलहाल इसके अमल पर रोक लगाई है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। यानी यह विवाद आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और न्यायपालिका दोनों में बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

कुल मिलाकर, Birthright Citizenship को सीमित करने की ट्रंप की दूसरी कोशिश भी अदालत में अटक गई है। पहले सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रयास को झटका दिया और अब मैरीलैंड की फेडरल अदालत ने नए आदेश के अमल पर रोक लगा दी। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति के सामने एक बार फिर बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा हो गया है—क्या राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश के जरिए अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता के दायरे को सीमित कर सकते हैं? फिलहाल अदालत का जवाब ट्रंप प्रशासन के पक्ष में नहीं गया है।

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