
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तेल संकट के बीच पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर दिखाई दे रहा है। हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद पेट्रोल की कीमत करीब 321.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 335.86 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। सरकार ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट को देखते हुए उठाया है, लेकिन इससे आम जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक Najam Sethi ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भी भारत की तरह रूस से सस्ता तेल खरीदने की कोशिश करनी चाहिए थी। सेठी ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान की सरकार तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को नोबेल शांति पुरस्कार दिलाने में लगी रही, जबकि दूसरी ओर भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल खरीदने का रास्ता तलाश लिया।
दरअसल वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने भारत को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की छूट दी है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बनी रहे और कीमतों में और उछाल न आए। इस फैसले से भारत को ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने में राहत मिल सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है और तेल की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से महंगाई और बढ़ सकती है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक संकट का असर वहां ज्यादा तेज़ी से महसूस किया जा रहा है।



