अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श का प्रमुख मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 की वार्षिक बैठक इस बार 19 से 23 जनवरी के बीच स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक को लेकर वैश्विक सियासी और आर्थिक जगत में पहले से ही उत्साह और हलचल बनी हुई है। खबर यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं इस बैठक में शामिल होंगे और वहाँ अपनी विचारधारा तथा नीतियों को विश्व नेताओं के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिससे इस सम्मेलन को और भी अधिक ध्यान केंद्रित कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक में आत्म-विश्वास के साथ अमेरिका के सबसे बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जिसमें उनके प्रशासन के कम से कम पांच कैबिनेट सदस्य भी शामिल हैं। यह आयोजन वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक असंतुलन, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा।
भारत की तरफ से भी इस उच्च-स्तरीय मंच पर मजबूत प्रस्तुति की आशा जताई जा रही है। कई केंद्रीय मंत्री और कम से कम छह मुख्यमंत्री सम्मेलन में भाग लेने के लिए दावोस पहुंचने वाले हैं। इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल, कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है, जिससे भारत की वैश्विक उपस्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत दिखाई दे रहे हैं।
यह बैठक “a spirit of dialogue” यानी “संवाद की भावना” के विषय के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसमें करीब 130 देशों के लगभग 3,000 वैश्विक नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। इस बैठक में न केवल राजनीतिक नेताओं की भागीदारी होगी, बल्कि दुनिया के औद्योगिक, तकनीकी और आर्थिक क्षेत्र के प्रमुख सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे। इसका मतलब यह है कि भारत न सिर्फ राजनीतिक स्तर पर बल्कि व्यावसायिक और निवेश क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका को परिभाषित करेगा।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के बीच केंद्रीय मंत्रियों के अलावा लगभग 100 से अधिक भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) भी शामिल होंगे, जो वैश्विक निवेश, नई तकनीकों तथा आर्थिक साझेदारी के अवसरों पर अपने विचार साझा करेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने आर्थिक और विकास-आधारित एजेंडे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े ही विस्तार के साथ रख रहा है।
दावोस की यह पांच दिवसीय बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया ग्लोबल इकॉनमी, वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव जैसे मामलों से जूझ रही है। यूक्रेन-रूस युद्ध, मध्य पूर्व की स्थितियाँ और बड़े-बड़े देशों के आर्थिक फैसलों के प्रभाव पर भी बात होने की उम्मीद है। इसके अलावा, तकनीकी विकास और वैश्विक सहयोग के रिश्तों पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है।
भारत के इस सम्मेलन में शामिल होने का असर केवल राजनीतिक अहंकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक निवेश, तकनीकी साझेदारी, व्यापार वृद्धि तथा आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोल सकता है। भारत की मजबूत भागीदारी से यह संदेश भी जाएगा कि देश न सिर्फ वैश्विक आर्थिक मंचों में सक्रिय है, बल्कि वह विश्व स्तर पर चुनौतियों का सामना करने और समाधान की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इस बार के WEF सम्मेलन की खास बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति का प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना और भारत का मजबूत प्रतिनिधिमंडल दोनों ही बैठक को विश्व समुदाय के बीच और अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बनाते हैं। इससे वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श और निर्णायक संवाद की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं।
