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ईरान विरोध प्रदर्शन पर ट्रंप की कड़ी चेतावनी, तेहरान ने दिया करारा जवाब — अमेरिका-ईरान संबंधों में फिर तनाव बढ़ा

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नई दिल्ली/वाशिंगटन/तेहरान: ईरान में जारी बड़े स्तर के विरोध प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक तीखी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने ईरान की राजधानी और अन्य शहरों में संघर्ष कर रहे प्रदर्शनकारियों के प्रति बल प्रयोग करने पर अमेरिका द्वारा हस्तक्षेप की बात कही। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि ईरान की सरकार शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है या उन्हें मार देती है, तो अमेरिका “उनकी मदद के लिए तैयार और तैयार है” और हस्तक्षेप करने को “लॉक्ड एंड लोडेड” (तैयार) है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में महंगाई, आर्थिक मंदी और कुपोषित अर्थव्यवस्था को लेकर विरोध पहले से ही बढ़ रहा है और कई शहरों में हिंसक झड़पें और बैठकों का दौर जारी है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार अब तक कई प्रदर्शनकारियों की मौतें हो चुकी हैं और मौके पर पुलिस तथा सुरक्षा बलों के साथ भी टकराव हुआ है।

ट्रंप की चेतावनी में क्या कहा गया?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संदेश में स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान की सेना या सुरक्षा बल शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों को हिंसा का शिकार बनाते हैं, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका लोगों की रक्षा के लिए “तैयार है और कार्रवाई करेगा”, जिसमें यह संकेत भी शामिल हो सकता है कि वह ईरानी शासन के खिलाफ सक्रिय रूप से कदम उठा सकता है।

ट्रंप के बयान को विश्लेषकों ने अमेरिका की प्रमुख विदेश नीतियों और मध्य पूर्व रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा है, जिसमें वह स्थानीय जनमत, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के नाम पर ईरान जैसे देशों के आंतरिक मामलों पर आवाज़ उठा रहे हैं।

ईरान का कड़ा जवाब — “लाल रेखा से आगे न बढ़ें”

ट्रंप की चेतावनी के तुरंत बाद ईरानी अधिकारियों ने भी कड़ा जवाब दिया है। अली लारीजानी, ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव, ने कहा कि अमेरिका का किसी भी तरह का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगा, साथ ही उन्होंने अमेरिका को “अपने सैनिकों की सुरक्षा” के बारे में सोचने की सलाह दी।

इसके अलावा अली शामख़ानी, जो सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार हैं, ने कहा कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को “तुरंत प्रतिक्रिया” मिलेगी और ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा “एक लाल रेखा” है, जिसको कोई चुनौती नहीं दे सकता।

ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप की इस चेतावनी को अंतरराष्ट्रीय मामलों में दखलअंदाज़ी बताया और उसे अमेरिका की आधिकारिक नीति विरोधी आलोचना के रूप में नकार दिया है। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका और उसके सहयोगी उनका देश अपनी राजनैतिक व सुरक्षा नीतियों को बदलने के लिए भीतरू अशांति को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं, जो किसी भी हालात में स्वीकार्य नहीं है।

ईरान में विरोध प्रदर्शन — कारण और असर

ईरान में विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी तथा राष्ट्रीय मुद्रा रियाल के मूल्य में भारी गिरावट के कारण शुरू हुए हैं। विरोध में दुनियाभर के शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और कई स्थानों पर विश्वविद्यालय के छात्र, व्यापारियों और आम नागरिकों ने भी भाग लिया है। विरोध का दायरा इतना बढ़ गया है कि यह पिछले कुछ वर्षों के सबसे बड़े आंदोलन में बदल गया है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए हैं और अपनी मांगों में शासन में सुधार, न्याय, और मौलिक अधिकारों की मांग को शामिल किया है। वहीं सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव ने कुछ स्थानों पर हिंसा को जन्म दिया है जिससे प्रत्यक्षदर्शियों और मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर

ट्रंप की चेतावनी एवं ईरान की प्रतिक्रिया के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुराना तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही परमाणु समझौते, आर्थिक प्रतिबंधों, तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर गंभीर मतभेद हैं। अब ईरान के भीतर चल रहे जन आंदोलनों ने इस तनाव को और भारी राजनीतिक मोड़ दे दिया है, जहां बाहरी शक्तियाँ अपने-अपने हितों के आधार पर बयान जारी कर रही हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह तनाव आगे बढ़ता है तो इससे मध्य पूर्व में स्थिरता, तेल बाजार की कीमतें तथा वैश्विक राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे, और कुछ मामलों में यह संघर्ष और गहरा भी हो सकता है।

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