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डोनाल्ड ट्रंप के अमीर बनने की कहानी: पाकिस्तान के क्रिप्टो सौदे से अरबों का मुनाफ़ा, भारत-टैरिफ युद्ध में वैश्विक कूटनीति की उलझन

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अमेरिका के वर्तमान या पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चर्चा सिर्फ राजनीति और अंतरराष्ट्रीय नीतियों तक ही सीमित नहीं रह गई है, बल्कि उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक धन-सम्पत्ति के मामले अब सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप और उनके परिवार ने पिछले एक साल में अपनी व्यक्तिगत संपत्ति में अरबों डॉलर की वृद्धि दर्ज की है, जिसमें पाकिस्तान के साथ क्रिप्टो डील-व्यवसाय का बड़ा योगदान रहा है — यही वजह है कि उनका धन-सम्पत्ति इतिहास में नई ऊँचाइयों तक पहुंचा है।

ट्रंप के परिवार का मुख्य व्यवसाय वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) नामक क्रिप्टो-कंपनी है, जो डिजिटल संपत्तियों, स्टेबलकॉइन्स और ब्लॉकचेन-आधारित पेमेंट सिस्टम पर काम करती है। इस कंपनी ने पाकिस्तान के डिजिटल पेमेंट ढांचे में प्रवेश किया है और वहां की सरकारी संस्थाओं के साथ क्रॉस-बॉर्डर क्रिप्टो साझेदारी पर समझौता किया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार के कारोबार को भारी अवसर मिलने का संकेत है।

पाकिस्तान सरकार ने इस डील को क्रॉस-बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने और डिजिटल वित्तीय तकनीक को अपनाने के एक कदम के रूप में बताया है, जबकि ट्रंप परिवार की कंपनी ने डाउनलोड-योग्य स्टेबलकॉइन को पाकिस्तान के डिजिटल वित्तीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी साझेदारी का परिणाम यह हुआ कि ट्रंप परिवार को दिसंबर 2025 तक लगभग $1 बिलियन (करीब ₹12,800 करोड़ से ज़्यादा) का मुनाफ़ा हुआ, जिसमें उनके पास लगभग $3 बिलियन के बिना बिके टोकन भी हैं, जो भविष्य में और ज़्यादा कमाई का स्रोत बन सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह क्रिप्टो-व्यवसाय सफलता “सिर्फ़ निवेश का परिणाम” नहीं है, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक उभरते हस्तक्षेप का भी संकेत है, विशेषकर जब अमेरिका के साथ पाकिस्तान के राजनयिक रिश्तों में समय-समय पर बदलाव देखने को मिलता रहा है। कई पारंपरिक रूप से कमजोर वित्तीय ढांचे वाले देशों के लिए डिजिटल मुद्रा और स्टेबलकॉइन एक नई अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहे हैं, और इसके माध्यम से ट्रंप जैसे प्रभावशाली कारोबारी एवं नेता अपने वित्तीय हितों को स्थापित कर रहे हैं।

इसी बीच, ट्रंप की टैरिफ और ट्रेड नीतियां भी वैश्विक व्यापार पर भारी असर डाल रही हैं। पिछले साल अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर उच्च टैरिफ लागू किए थे, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और राजनीतिक टकराव बढ़ा। इन व्यापारिक तनावों के बीच भी ट्रंप अपने निजी कारोबार को लाभ का स्रोत बनाने में सफल दिखाई दे रहे हैं — जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी नीतियाँ सिर्फ राजनीतिक एजेंडा ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आर्थिक लाभ को भी सेवा देती प्रतीत होती हैं।

ट्रंप की संपत्ति में बढ़ोतरी और उनके परिवार की व्यवसाईक गतिविधियाँ — चाहे वह रियल-एस्टेट, क्रिप्टो निवेश, डिजिटल प्रोजेक्ट्स हों या मीडिया संबद्ध सौदे — सभी मिलकर यह दिखाते हैं कि वह राजनीति एवं बिज़नेस को एक साथ जोड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं, जो कि पिछले राष्ट्रपति कार्यकालों और परंपरागत मानकों के परे का मामला है।

हालांकि उनके समर्थक इसे “व्यवसाय में महारत” कह सकते हैं, आलोचक इसे राजनीति-बिज़नेस टकराव और नैतिकता के प्रश्न के रूप में देखते हैं। ट्रंप की नीतियाँ अमेरिका की आर्थिक नीति, वैश्विक व्यापार संतुलन और भू-राजनीतिक रिश्तों पर बड़े प्रभाव डाल रही हैं, और इस बीच उनके पारिवारिक संसाधनों में उल्लेखनीय वृद्धि इस पूरे विषय को अंतरराष्ट्रीय राजनीति तथा व्यावसायिक नैतिकता के संगम पर खड़ा कर देती है।

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