Site icon Prsd News

E20 पेट्रोल पर सरकार सख्त, क्लोराइड और नमी की जांच होगी अनिवार्य; गाड़ियों के पार्ट्स खराब होने की शिकायतों के बाद बड़ा कदम

images 2 25

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार अब इसकी क्वालिटी पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी कर रही है। 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल वाले E20 फ्यूल की ब्लेंडिंग को लेकर पहले से ही वाहन मालिकों के बीच माइलेज और इंजन से जुड़ी चिंताएं सामने आती रही हैं। अब सरकार का फोकस सिर्फ इथेनॉल की मात्रा पर नहीं, बल्कि पेट्रोल में मौजूद दूषित तत्वों और उसकी गुणवत्ता पर भी है। हाल में कुछ वाहन कंपनियों ने E20 पेट्रोल के नमूनों में ज्यादा क्लोराइड और नमी मिलने की शिकायत की थी, जिसके बाद यह कदम उठाया जा रहा है। 

मौजूदा व्यवस्था के तहत E20 पेट्रोल में क्लोराइड कंटैमिनेशन की मात्रा 3 पार्ट्स प्रति मिलियन यानी 3 PPM से कम होनी चाहिए। अभी यह सीमा क्वालिटी स्टैंडर्ड का हिस्सा तो है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसका मतलब यह होगा कि तेल कंपनियों और फ्यूल सप्लाई चेन से जुड़ी एजेंसियों को तय सीमा का सख्ती से पालन करना पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य पेट्रोल पंपों तक निर्धारित गुणवत्ता वाला साफ ईंधन पहुंचाना है।

फ्यूल की गुणवत्ता से जुड़े मानक तय करने वाली संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS इस मामले पर काम कर रही है। सरकारी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, E20 पेट्रोल में क्लोराइड सहित अलग-अलग दूषित तत्वों की स्वीकार्य सीमा को अनिवार्य किया जा सकता है। इससे फ्यूल की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण रखने और सप्लाई के दौरान होने वाले प्रदूषण या मिलावट को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब E20 पेट्रोल को लेकर वाहन उद्योग की चिंताएं भी सामने आई हैं। कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर सप्लाई किए गए E20 फ्यूल में क्लोराइड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा और नमी मौजूद थी। कंपनियों की चिंता है कि इस तरह का दूषित ईंधन वाहन के कुछ हिस्सों पर प्रतिकूल असर डाल सकता है और कुछ कंपोनेंट्स के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मामलों में वाहनों के फ्यूल टैंक से लिए गए पेट्रोल के नमूनों में क्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाए जाने की बात भी सामने आई है।

सरकार के इस कदम को E20 पेट्रोल की पूरी नीति में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल मुद्दा इथेनॉल ब्लेंडिंग को कम या खत्म करने का नहीं, बल्कि E20 की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का है। सरकार पहले ही E20 ब्लेंडिंग के लक्ष्य को हासिल कर चुकी है और अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर पहुंचने वाला ईंधन तय मानकों के अनुरूप हो। सरकार ने हाल में भी स्पष्ट किया है कि E20 से आगे ब्लेंडिंग बढ़ाने का तत्काल कोई फैसला नहीं लिया गया है और भविष्य में किसी भी बदलाव से पहले वैज्ञानिक तथा तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे। 

E20 को लेकर वाहन मालिकों की एक बड़ी शिकायत माइलेज में कमी को लेकर भी रही है। हालांकि, सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक परीक्षण और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों में व्यापक स्तर पर इंजन खराब होने की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार ने यह भी कहा है कि E20 के इस्तेमाल से होने वाला ईंधन दक्षता में बदलाव वाहन के डिजाइन, ड्राइविंग परिस्थितियों और रखरखाव जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

वहीं, E20 के समर्थकों का तर्क है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा बचाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है। सरकार के अनुसार, E20 कार्यक्रम के जरिए देश ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत की है और किसानों के लिए भी इथेनॉल अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त बाजार तैयार हुआ है। इसलिए सरकार की मौजूदा दिशा E20 को वापस लेने की बजाय उसकी गुणवत्ता और सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नए नियम लागू होने के बाद पेट्रोल पंपों तक पहुंचने वाले E20 फ्यूल की जांच कितनी सख्ती से होती है। यदि क्लोराइड, नमी और दूसरे दूषित तत्वों की सीमा अनिवार्य कर दी जाती है और नियमित जांच प्रभावी तरीके से होती है, तो खराब गुणवत्ता वाले फ्यूल से वाहन के कंपोनेंट्स को होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों, तेल कंपनियों और सप्लाई चेन में जिम्मेदारी भी अधिक स्पष्ट होगी।

फिलहाल सरकार की तैयारी का सीधा असर आम वाहन मालिकों पर यह है कि E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतों को अब अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि E20 पेट्रोल की वजह से सामान्य तौर पर गाड़ियों के इंजन या पार्ट्स खराब हो रहे हैं। मौजूदा मामला खास तौर पर दूषित या निर्धारित मानकों से बाहर के फ्यूल से जुड़ी चिंताओं का है। ऐसे में आने वाले समय में नए क्वालिटी नियम और उनकी निगरानी यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि E20 फ्यूल वाहन मालिकों के लिए कितना भरोसेमंद साबित होता है।

Exit mobile version