देशभर में मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इस चरण के तहत सबसे पहले ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में व्यापक अभियान शुरू किया गया है। शनिवार से बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन शुरू कर दिया। चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
चुनाव आयोग ने 14 मई को 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में SIR फेज-III लागू करने की घोषणा की थी। इस चरण में करीब 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं को कवर किया जाएगा। आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से इसलिए की जा रही है ताकि जनगणना की हाउस लिस्टिंग गतिविधियों के साथ समन्वय बना रहे और फील्ड मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
ओडिशा में इस अभियान को लेकर जिला स्तर पर तैयारियां पहले से ही शुरू कर दी गई थीं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए पात्र मतदाताओं का नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाने और गलत विवरणों को ठीक करने का काम तेजी से पूरा करें। राजनीतिक दलों से भी बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने को कहा गया है ताकि प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। ओडिशा में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन किया जाएगा, जबकि प्रारूप मतदाता सूची 5 जुलाई को प्रकाशित होगी। अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी।
मणिपुर में यह प्रक्रिया ऐसे समय शुरू हुई है जब राज्य अभी भी हिंसा और विभिन्न क्षेत्रों में सड़क अवरोध जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके बावजूद चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होने दिया जाएगा। मणिपुर में दो दशकों से अधिक समय बाद इस तरह का व्यापक मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिजोरम और सिक्किम में भी बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इस दौरान मतदाताओं की पहचान, निवास और अन्य आवश्यक विवरणों का सत्यापन किया जाएगा। चुनाव आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे अधिकारियों के साथ सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि मतदाता सूची पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित बनाई जा सके।
चुनाव आयोग का मानना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण, पलायन और जनसंख्या परिवर्तन के कारण समय-समय पर मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण आवश्यक हो जाता है। आयोग के अनुसार कई वर्षों बाद बड़े स्तर पर यह विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिससे मतदाता डेटा को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के तहत उन लोगों को नोटिस भी भेजे जाएंगे जिनकी जानकारी पिछले रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती या जिनके दस्तावेजों को लेकर संदेह होगा।
फेज-III पूरा होने के बाद देश के अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। चुनाव आयोग के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को फिलहाल इस चरण से बाहर रखा गया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसी उद्देश्य से यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया के नतीजे सामने आने के बाद कई राज्यों की मतदाता सूची में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
