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Elon Musk की SpaceX Starship ने पहली बार रचा इतिहास, ऑर्बिट में पहुंचकर 26 Starlink सैटेलाइट छोड़े; फिर क्यों खत्म हुई उड़ान?

एलन मस्क की कंपनी SpaceX के Starship रॉकेट ने अंतरिक्ष में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 28 सितंबर को हुए अपने 14वें टेस्ट मिशन में Starship पहली बार पृथ्वी की कक्षा यानी ऑर्बिट तक पहुंचा और वहां 26 नई पीढ़ी के Starlink V3 सैटेलाइट तैनात किए। हालांकि, मिशन पूरी तरह तय योजना के मुताबिक नहीं चल पाया और इंजन में आई तकनीकी समस्या के बाद SpaceX ने उड़ान को निर्धारित समय से काफी पहले खत्म करने का फैसला किया।

Starship ने टेक्सास स्थित SpaceX के Starbase लॉन्च कॉम्प्लेक्स से उड़ान भरी। यह करीब 124 मीटर लंबा Super Heavy-Starship सिस्टम है और इसे दुनिया के सबसे बड़े तथा शक्तिशाली रॉकेटों में गिना जाता है। इससे पहले Starship की 13 टेस्ट उड़ानें हुई थीं, लेकिन उनमें इसे जानबूझकर सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर रखा गया था। इस बार पहली बार रॉकेट को पूरी ऑर्बिटल स्पीड तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

उड़ान के शुरुआती चरण में एक बड़ा तकनीकी झटका लगा। Starship के ऊपरी चरण के Raptor इंजनों में से एक इंजन समय से पहले बंद हो गया। इस स्थिति में कुछ देर के लिए मिशन के ऑर्बिट तक पहुंचने को लेकर आशंका पैदा हुई, लेकिन फ्लाइट कंट्रोल टीम ने टेलीमेट्री का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखने का फैसला किया। बाकी सिस्टम सामान्य तरीके से काम कर रहे थे, इसलिए Starship ने आगे बढ़ते हुए ऑर्बिटल इंसर्शन बर्न पूरा किया।

इंजन की समस्या के बावजूद Starship करीब 25 मिनट के भीतर पृथ्वी की ऑर्बिट में पहुंच गया। यह मिशन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक रही, क्योंकि इससे पहली बार साबित हुआ कि Starship अपने मौजूदा सिस्टम के साथ ऑर्बिटल मिशन पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके बाद रॉकेट ने 26 नए Starlink V3 सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े। ये SpaceX के इंटरनेट नेटवर्क की नई पीढ़ी के सैटेलाइट हैं और इनमें पिछली पीढ़ी की तुलना में काफी अधिक डेटा क्षमता बताई गई है।

हालांकि, मिशन की मूल योजना करीब 10 घंटे तक उड़ान भरने और पृथ्वी के छह चक्कर लगाने की थी। इंजन में आई समस्या को देखते हुए SpaceX ने अतिरिक्त जोखिम लेने के बजाय मिशन को जल्द समाप्त करने का फैसला किया। कंपनी के अनुसार, इंजन संबंधी समस्या के बाद सावधानी बरतते हुए ऑर्बिट में बिताया जाने वाला समय कम किया गया और Starship को वापस पृथ्वी पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

Starship ने पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश किया और प्रशांत महासागर में हवाई के उत्तर में नियंत्रित स्प्लैशडाउन किया। पूरी उड़ान करीब तीन घंटे चली। लैंडिंग के दौरान रॉकेट समुद्र में गिरने के बाद पलट गया और उसमें बचा हुआ ईंधन आग की लपटों के साथ जल गया। इसे मिशन की असफलता के बजाय पहले से तय समुद्री स्प्लैशडाउन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा गया, हालांकि उड़ान का निर्धारित समय से पहले खत्म होना इंजन संबंधी समस्या से जुड़ा था।

इस मिशन की सफलता NASA के Artemis कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है। NASA भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों को भेजने की योजना में Starship के एक विशेष लैंडर वर्जन का इस्तेमाल करना चाहता है। इसके लिए Starship को न सिर्फ ऑर्बिट तक पहुंचने बल्कि लगातार सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से उड़ान भरने, ईंधन ट्रांसफर और अन्य जटिल प्रक्रियाओं को पूरा करने में सक्षम साबित करना होगा। इंजन की समस्या के बावजूद इस टेस्ट में ऑर्बिट तक पहुंचना और सैटेलाइट तैनात करना आगे के विकास के लिए महत्वपूर्ण डेटा उपलब्ध कराता है।

Starship की इस उड़ान से SpaceX के लिए एक और बड़ा लक्ष्य पूरा हुआ है। पहली बार इस रॉकेट ने ऑपरेशनल सैटेलाइट पेलोड को ऑर्बिट में पहुंचाया। 26 Starlink V3 सैटेलाइटों की तैनाती से यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य में Starship का इस्तेमाल बड़े और भारी पेलोड को एक साथ अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। इससे SpaceX के Starlink नेटवर्क के विस्तार में भी इस रॉकेट की भूमिका बढ़ सकती है।

हालांकि, इंजन की समस्या ने यह भी दिखाया कि Starship को नियमित और भरोसेमंद ऑपरेशन के स्तर तक पहुंचने के लिए अभी और परीक्षण की जरूरत है। Reuters के अनुसार, इस तरह की इंजन समस्या NASA के आगामी चंद्र मिशनों की समयसीमा के लिए भी चुनौती बन सकती है, क्योंकि चंद्रमा तक मानव मिशन के लिए Starship की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल इस एक उड़ान के आधार पर भविष्य के मिशनों की समयसीमा पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

कुल मिलाकर, Starship Flight 14 में एक तरफ पहली बार ऑर्बिट तक पहुंचने और 26 Starlink सैटेलाइट तैनात करने जैसी बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं, तो दूसरी तरफ इंजन में आई ख

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