यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को अपनी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे यह समूह अल-कायदा, हमास और ISIS जैसे अन्य कुख्यात आतंकवादी संगठनों के समान दर्ज होगा। यह प्रस्ताव शुक्रवार को EU विदेश मंत्रियों की बैठक में राजनीतिक रूप से स्वीकृत होने के करीब है और इसे लागू करने के लिए संघ के 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक है।
ईयू की इस चेतावनीपूर्ण कार्रवाई की पृष्ठभूमि ईरान में पिछले कई हफ्तों से जारी आंदोलनों पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की क्रूर दमन नीति रही है, जिसमें उल्लिखित समूह पर हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या करने का आरोप लगा है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सैकड़ों से लेकर 6,000 से अधिक मौतों के बीच IRGC की भूमिका रही है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरा विरोध उत्पन्न किया है।
यूरोपीय संघ के शीर्ष कूटनीतिक प्रतिनिधि काजा कालस ने कहा है कि “जो आतंकी जैसा व्यवहार करता है, उसे आतंकी की भांति ही माना जाना चाहिए”, इसीलिए IRGC को आतंकवादी सूची में डाला जा रहा है। इससे समूह के सदस्यों पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति凍結 आदि कड़े प्रतिबंध लागू किए जाएंगे और इसका उद्देश्य ईरान के भीतर तथा उसके विश्वस्तर पर गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है।
यह प्रस्ताव पहले कुछ EU सदस्य देशों के विरोध का सामना कर रहा था। विशेष रूप से फ्रांस ने आरंभ में चेतावनी दी थी कि IRGC को सूचीबद्ध करने से फ्रांसीसी नागरिकों और राजनयिकों की सुरक्षा जोखिम में पड़ सकती है और सीमित कूटनीतिक चैनलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन अब फ्रांस ने अपनी प्रतिबद्धता बदल दी है और IRGC को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिससे यह कदम और भी बल मिला है।
प्रस्ताव में शामिल होने से IRGC पर पहले से लागू प्रतिबंध और भी कठोर हो सकते हैं, क्योंकि इस कदम के साथ इसे यूरोपीय संघ के आपराधिक और आर्थिक प्रतिबंधों के दायरे में लाया जाएगा, जिसमें वित्तीय संसाधनों पर रोक, यूरोपीय क्षेत्रों में कार्य प्रतिबंध आदि शामिल हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इस निर्णय का वैश्विक राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यूरोपीय संघ की यह कार्रवाई संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की पहले से मौजूद नीतियों के साथ तालमेल खाती है, जिनमें IRGC को पहले ही अलग-अलग रूप से आतंकवादी समूह घोषित किया जा चुका है या प्रतिबंधित किया गया है।
ईरान ने इस कदम पर अब तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन तेहरान-ब्रुसेल्स संबंधों में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यूरोपीय संघ की यह चेतावनी न केवल मानवाधिकारों की रक्षा और हिंसा के खिलाफ एक सशक्त संदेश है, बल्कि यह मध्य पूर्व में राजनीतिक और सुरक्षा संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
