Site icon Prsd News

ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद यूएई के फुजैरा तेल टर्मिनल में भीषण आग, काला धुआँ उठता दिखा

download 6 7

मध्य-पूर्व में चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के महत्वपूर्ण तेल केंद्र फुजैरा में बड़ा हादसा सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार फुजैरा पोर्ट स्थित एक प्रमुख तेल टर्मिनल में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके बाद इलाके में काले धुएँ का विशाल गुबार आसमान में उठता दिखाई दिया। यह घटना उस समय हुई जब कुछ ही घंटों पहले अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग उस समय लगी जब एक ड्रोन हमले को रोकने के दौरान उसका मलबा फुजैरा बंदरगाह के तेल भंडारण क्षेत्र के पास गिर गया। इसके कारण तेल टर्मिनल में आग भड़क उठी और कुछ समय के लिए तेल लोडिंग से जुड़ी गतिविधियों को रोकना पड़ा। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि नागरिक सुरक्षा टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

फुजैरा बंदरगाह दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में से एक माना जाता है। यह वैश्विक तेल व्यापार और बंकरिंग का बड़ा हब है और यहां से प्रतिदिन लगभग 10 लाख बैरल तक कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य या सुरक्षा घटना का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिका द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव के और बढ़ने का संकेत है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या तेल ढांचे पर हमला किया गया तो वह क्षेत्र में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बना सकता है। इसी वजह से खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

दरअसल फुजैरा पोर्ट पहले भी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण चर्चा में रहा है। हाल के महीनों में ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में कई हमले किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश को यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने नाकाम कर दिया। हालांकि कई बार गिरने वाले मलबे से बंदरगाह और तेल टैंक को नुकसान पहुंचा है, जिससे आग और धुएँ की घटनाएं सामने आई हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में यह संघर्ष और तेज होता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर पहले ही जहाजों की आवाजाही कम हो चुकी है और कई तेल कंपनियां स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

Exit mobile version