देशभर में आज यानी 14 सितंबर 2026, सोमवार को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इसी के साथ 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक और देश के दूसरे हिस्सों में श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा घरों और पंडालों में स्थापित कर विघ्नहर्ता की पूजा-अर्चना करेंगे। गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इस दिन गणपति स्थापना के लिए दोपहर का समय विशेष शुभ माना जाता है।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?
धार्मिक पंचांगों के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न का समय सबसे शुभ माना गया है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं में नई दिल्ली के लिए स्थापना का मुहूर्त लगभग सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। वहीं कुछ अन्य पंचांगों में शहर और गणना पद्धति के अंतर के कारण कुछ मिनट का फर्क देखने को मिल सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय देखना चाहिए।
एक अन्य पंचांग गणना में गणेश स्थापना का विशेष मुहूर्त सुबह 11:21 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक बताया गया है। इससे साफ है कि अलग-अलग पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, लेकिन सभी गणनाएं मध्याह्न काल को ही प्रमुख मानती हैं।
आज का राहुकाल कब रहेगा?
14 सितंबर को सोमवार होने के कारण राहुकाल सुबह के समय पड़ता है। उदाहरण के लिए दिल्ली क्षेत्र की पंचांग गणना में यह समय लगभग सुबह 7:41 बजे से 9:13 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य की शुरुआत से बचने की परंपरा है। हालांकि, पूजा-पाठ और नियमित धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में मत हो सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर कौन से काम किए जाते हैं?
गणपति स्थापना के बाद भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। भक्त उन्हें दूर्वा, फूल, फल और मोदक सहित विभिन्न नैवेद्य अर्पित करते हैं। घर में गणेश जी की स्थापना के बाद श्रद्धालु प्रतिदिन आरती और पूजा करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि तथा शुभता का देवता माना जाता है, इसलिए गणेश उत्सव के दौरान लोग परिवार की सुख-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
इस बार गणेश चतुर्थी के साथ एक और धार्मिक पर्व भी पड़ रहा है। 14 सितंबर को हरतालिका तीज भी मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार हरतालिका तृतीया की तिथि सुबह समाप्त होने के बाद गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि शुरू होती है।
कब होगा गणपति विसर्जन?
गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, इसलिए इस दिन देशभर में बड़े स्तर पर गणपति विसर्जन किया जाएगा। हालांकि, घर में स्थापित गणपति की परंपरा और परिवार की मान्यता के अनुसार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद भी विसर्जन किया जा सकता है।
गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालुओं के बीच ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंजेंगे। वहीं कई शहरों में बड़े सार्वजनिक पंडालों और गणेश उत्सव कार्यक्रमों की भी तैयारी की गई है। प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से भी विसर्जन स्थलों पर व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर तैयारियां की जाती हैं। भक्तों से पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा और सुरक्षित विसर्जन अपनाने की अपील भी की जाती है।
