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ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले में GBU-28 लेजर-गाइडेड बम का इस्तेमाल, कमांड सेंटर सहित खामेनेई का कंपाउंड तबाह

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संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए नवीनतम और बेहद सटीक सैन्य अभियान में GBU-28 लेजर-गाइडेड बम जैसे उच्च-प्रौद्योगिकी हथियारों का इस्तेमाल किया गया है, जिसने मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा पर नया भूचाल पैदा कर दिया है। इस संयुक्त हमले के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और शीर्ष सैन्य तथा राजनीतिक कमांडरों को निशाना बनाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनके नेतृत्व के प्रमुख केंद्र तथा कमांड संरचनाओं को भारी क्षति पहुंची है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर बंकर बस्टर बमों को तैनात किया, जिनमें GBU-28 बम प्रमुख भूमिका में था — यह अत्यंत भारी और सटीक निर्देशित हथियार है जिसे विशेष रूप से मजबूत ठिकानों और भूमिगत कमांड बंकरों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है।

सूत्रों के अनुसार खामेनेई के कंपाउंड में करीब 30 ऐसे बम गिराए गए, जिनके लिए कई F-15 और अन्य लड़ाकू विमानों को एक साथ तैनात करना पड़ा। प्रत्येक बम लगभग 2268 किलोग्राम वजन का है और यह अत्यधिक सटीक लेजर मार्गदर्शन सिस्टम से लैस है, जिससे लक्ष्य पर निशाना बिल्कुल सटीक बैठता है। इन बमों की क्षमता इतनी अधिक मानी जाती है कि वे भारी-भरकम संरचनाओं और गहरे भूमिगत कमांड रूमों को भी 20-30 फीट तक भेद सकते हैं।

इस संयुक्त संचालन को अंजाम देने से पहले दोनों देशों ने महीनों तक गहन खुफिया विश्लेषण और योजना-बद्ध तैयारी की, ताकि जब सब उच्च-स्तरीय नेता एक ही स्थान पर हों तब सटीक समय और लक्ष्य पर हमला किया जा सके। इस दौरान अमेरिका और इजरायल के वरिष्ठ सैन्य कमांडर को ईरान के नेतृत्व की चल रही बैठकों और रणनीतिक सम्मेलनों की विस्तृत जानकारी मिली, जिससे उन्हें सही समय पर हमला करने की नींव मिली।

हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें दागने का भी प्रयास किया, लेकिन अधिकांश मिसाइलें रोक ली गईं या उनका प्रभाव सीमित रहा। इस युद्ध-परिस्थिति ने न केवल क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी व्यापक चिन्ता पैदा कर दी है। ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व को हुए इस गंभीर झटके के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और खाड़ी देशों सहित कई अन्य देश अपनी सुरक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करने में लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले से मध्य पूर्व की राजनीति में जो परिवर्तन आएगा, उसका प्रभाव आने वाले महीनों और वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय मंच पर देखा जाएगा।

इस ऑपरेशन से स्पष्ट हो गया है कि आधुनिक तकनीकों और उच्च-प्रभावी हथियारों के संयोजन से किस प्रकार बेहद संरक्षित सुरक्षा ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है। GBU-28 जैसे हथियारों की मौजूदगी और उसकी कार्यक्षमता ने युद्ध रणनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है, जिससे भविष्य के सैन्य संघर्षों के रूप-रेखाओं और भी बदलने का संकेत मिलता है।

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